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योग क्या है अर्थ,उत्पति, उद्देश्य, प्रकार, लाभ सब कुछ

योग शब्द भारत के हिंदू धर्म से आया हुआ है जिसमें मनुष्य को अपने जीवन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए योग का सहारा लिया जाता है हिंदू धर्म के ग्रंथो में योग मोक्ष पाने के लिए किया जाता जाता है योग अध्यात्म के मार्ग और वैज्ञानिक दोनों प्रकार से व्यक्ति को लाभ प्रदान करते हैं अध्यात्म मार्ग में योग व्यक्ति को अपने जीवन के जन्म मरण के चक्र से छूटने के लिए इन योग के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने की क्रिया योग के नाम से जाना जाता है योग एक अध्यात्मिक विषय है और इसका प्रयोग अध्यात्म के मार्ग में किया जाता है लेकिन इसका व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है यह मनुष्य को अनेकों प्रकार से बीमारियों और रोगों से बचाता है और मन को शांत करने व शरीर को स्वस्थ रखने में भी बेहद ही काम करता है


भारत देश में योग का बेहद ही बड़ा महत्व है हिंदू धर्म ग्रंथो में योग के बारे में अधिक जानकारी मिलता है जिसमें उनके भगवान स्वयं योग करते हैं इससे यह तय किया जा सकता है कि योग कितना बड़ा है योग ही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा आत्मज्ञान अपने शरीर के भीतर संपूर्ण रहस्य को जाना जा सकता है कि शरीर कैसे काम करता है मन बुद्धि कैसे काम करते हैं यह पूरा ब्रह्मांड कैसे काम करता है संपूर्ण ज्ञान योग के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है अन्य ऐसा कोई भी मार्ग नहीं है जिसके द्वारा संपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है

Table of contents 

3. योग की उत्पत्ति, इतिहास
4. योग का उद्देश्य

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ध्यान मुद्रा में भगवान शिव


योग क्या है

योग अर्थात जुड़ना मिलना जिसमें व्यक्ति अपने शरीर के भीतर बैठे परम ज्योति स्वरूप परमात्मा से जुड़ता है जब वह अपने चेतना रूपी जीवात्मा शरीर को परमात्मा की आत्मा से संपर्क करा देता है उनसे मिल जाता है तब उसे योग की सिद्धि प्राप्त होती है यही जाकर योग बन जाता है जो योग का मुख्य कार्य मनुष्य की चेतन को परमात्मा की चेतना में मिलना उनसे जुड़ना योग कहलाता है 

योग के अनुसार यह पूरा ब्रह्मांड अज्ञान के कारण ही चलता है माया अपना प्रभाव दिखाई है जिसके द्वारा यह सब वैज्ञानिक रूप से दिखाई देता है लेकिन यह सब प्रकृति माया के अनुसार चलता है जब व्यक्ति योग के माध्यम से परमात्मा का दर्शन करता है तब उसे सब कुछ पता चल जाता है कि यह पूरा शरीर कैसे काम करता है यह ब्रह्मांड कैसे काम करता है यह सब कुछ जानकार वह मोक्ष को प्राप्त कर लेता है परमात्मा से दर्शन उनसे जुड़ने का यही कार्य योग करता है जब वह प्रकृति रूपी माया के अज्ञान को मिटाकर सत्य को जान लेता है तब प्रकृति माया से मुक्त होकर मुक्त को प्राप्त हो जाता है।


योग का अर्थ 

योग का अर्थ यह होता है कि जब सवाल आता है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है और उसे कैसे पूरा किया जाता है इस प्रश्न का जवाब हिंदू धर्म के ग्रंथ में मिलता है कि मनुष्य जन्म का प्रमुख उद्देश्य क्या पता चलता है मनुष्य को इस जीवन के जन्म मरण के चक्र से छूटकर सदा के लिए मोक्ष प्राप्त करना होता है और मोक्ष केवल योग के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है  बिना योग के मार्ग पर चले किसी भी व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती यह काम योग ही करता है

योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि में परमात्मा को प्राप्त करना उनसे मिलना जुड़ना उनका दर्शन करना यह पूरी प्रक्रिया योग कहलाती है योग एक ऐसा रास्ता है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने भीतर शरीर में स्थित परमात्मा का दर्शन करता है जिससे उसे संपूर्ण आत्मज्ञान प्राप्त होता है और वह प्रकृति माया से छूटकर परमात्मा को प्राप्त करके मुक्ति को प्राप्त करता है


योग का उत्पति ,इतिहास

योग भारत देश की देन है भारत देश के हिंदू धर्म के ग्रंथो से आया हुआ है योग की उत्पत्ति हिंदू धर्म को माना जाता है और हिंदू धर्म की उत्पत्ति सनातन है इसका कोई भी प्रमाण नहीं मिलता है कि हिंदू धर्म की उत्पत्ति कैसे हुई है यह अजन्मा माना जाता है इसका उत्तर आज के वैज्ञानिक भी नहीं खोज पाए है हिंदू धर्म का जन्म कैसे हुआ है और यह कितना पुराना है

सबसे पुराना हिंदू मंदिर , एक पत्थर का बना पुराना मंदिर,old temple of India,
हिंदू धर्म का पुराना मंदिर भारत



योग का इतिहास हिंदू धर्म के ग्रंथो में मिलता है जिसमें वेद, पुराण, उपनिषद, भगवत गीता, यह हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं जिसमें योग का उत्पत्ति माना जाता है इन ग्रंथो में योग की विभिन्न प्रकार के योग बताए गए हैं जिसमें किसी भी एक योग के मार्ग पर चलकर मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है


योग इतना बड़ा है कि हिंदू धर्म के परमात्मा स्वयं भगवान विष्णु, भगवान शिव, स्वयं में लीन रहते हैं वे स्वयं योग का अभ्यास करते हैं और वे सदा योग में स्थित रहते हैं इससे यह पता लगाया जा सकता है कि योग का कितना बड़ा महत्व है जिसमे परमात्मा स्वयं योग कर रहे है


भगवान विष्णु,भगवान शिव, योग मुद्रा में स्थित भगवान,योग ध्यान शिव,
भगवान श्री विष्णु शिव ध्यान में लीन इमेज



योग का उद्देश्य 

योग का उद्देश्य केवल मनुष्य के शरीर में विराजमान अपने जीवात्मा के भीतर परमात्मा से मिलना उनसे जुड़ना संपर्क करना उनमें लीन हो जाना योग परम उद्देश्य होता है योग परमात्मा से संपर्क करने के लिए ही बना है और इसका मुख्य उद्देश्य परमात्मा प्राप्ति उनसे जुड़ना ही होता है इसके दौरान व्यक्ति को अन्य को प्रकार के लाभ ही प्राप्त होते हैं जिसकी आगे हम व्याख्या करने वाले हैं

योग का महत्व

मानव जीवन में योग का बड़ा महत्व है हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार मनुष्य योनि एक ऐसा जरिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने जीवन के जन्म मरण के चक्र से छुटकर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है अन्य योनियों द्वारा पशु, पक्षी, जानवर, जैसे प्राणी अपने जीवन के दौरान मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकते उनका विधान नहीं बनाया गया है क्योंकि मनुष्य के कर्म अनुसार उन्हें जीव जंतु की योनि प्राप्त होती है यह योनि भोगने के लिए होती है इस कारण वे मोक्ष को प्राप्त नहीं होते केवल मनुष्य योनि ही व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त कर सकता है इसलिए योग का व्यक्ति के जीवन में बड़ा महत्व है


योग का ना पालन करने से व्यक्ति का जीवन लक्ष हीन हो जाता है क्योंकि भगवत गीता में कहा गया है मनुष्य के जीवन का प्रथम उद्देश्य कर्म बंधन से छूटकर मोक्ष को प्राप्त करना होता है और योग ही व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त कर सकता है अन्य कोई रास्ता नहीं है जिसके द्वारा व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त कर सके।


योग के प्रकार 

योग एक परमात्मा से संपर्क उनसे जुड़ने का तरीका होता है और योग के प्रकार अनेक हैं जो रास्ता परमात्मा से संपर्क करा सकता है उनसे मिला सकता वही योग हैं इस कारण योग कितने प्रकार के हैं इसका अभी तक कोई गड़ना नहीं हो पाया है की योग कितने प्रकार के होते हैं लेकिन आपको हम योग के प्रमुख प्रकार बता रहे हैं इसके द्वारा आप इन मार्ग से अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

1.राज योग 

अपने मन को नियंत्रित करते हुए परमात्मा का ध्यान करना उनसे मिलना राजयोग कहलाता है

2.कर्म योग

निष्काम कर्म योग द्वारा किया जाता है जिसमें फल की इच्छा त्याग कर अपने धर्म के अनुसार कर्म करना कर्म योग कहलाता है

3.ज्ञान योग

गुरु से परमात्मा का ज्ञान लेकर उनसे संपर्क करना मिलना ज्ञान योग कहलाता है

4.भक्ति योग

परमात्मा में श्रद्धा विश्वास उनको अपने जीवन का संपूर्ण समर्पण कर देना भक्ति योग कहलाता है

5.नाद योग

शरीर के भीतर ध्वनियों पर धारणा ध्यान करते हुए परमात्मा को प्राप्त करना नाद योग कहलाता है

6.कुंडलनी योग

इसमें शरीर के सातों चक्र को जागृत करते हुए ब्रह्मनंद में परमात्मा का दर्शन करना कुंडली योग कहलाता है

7.हठ योग

इसमें शरीर को अनुशासित करते हुए मन, शरीर, बुद्धि, को वश में करते हुए अपने चित्त को परमात्मा में लगाने से योग में सिद्ध होती है और परमात्मा का मिलन हो पता है यह हठ योग कहलाता है

8.अष्टांग योग

महर्षि पतंजलि के योग सूत्र के अनुसार यम ,नियम, आसन, प्राणायाम , प्रत्याहार,धारणा, ध्यान, समाधि के द्वारा केवल्य को प्राप्त करना से परमात्मा का दर्शन होना अष्टांग योग कहलाता है इन अष्ठ नियमों से परमात्मा का दर्शन अष्टांग योग कहलाता है

9.प्रेम योग

परमात्मा में संपूर्ण प्रेम करना उनके ऊपर अपनी संपूर्ण जीवन को समर्पित कर देना और संसार को भूल जाना केवल ईश्वर में डूब जाना प्रेम योग कहलाता है

10.मंत्र योग

परब्रह्म परमात्मा का मंत्र जाप के द्वारा परमात्मा का दर्शन करना मंत्र योग कहलाता है

11.मोक्ष संन्यास योग

इसके अंतर्गत संन्यास के माध्यम से ध्यान के द्वारा परमात्मा को प्राप्त करना मोक्ष सन्यास योग कहलाता है

12.लय योग 

यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि, में जब मन परमात्मा में लीन हो जाता है तब लय योग प्राप्त होता है

13.अक्षर ब्रह्म योग

ज्ञान के माध्यम से अक्षर ब्रह्म को जानना उनमें धारणा ध्यान के द्वारा उनको प्राप्त करना अक्षर ब्रह्म योग कहलाता है

14.तंत्र योग

तंत्र के द्वारा एक विधिवत परमात्मा को प्राप्त करना तंत्र योग कहलाता है

15. निष्काम योग 

कर्म फल की इच्छा त्याग कर अपने धर्म के अनुसार कर्म करने से एक समय बाद परमात्मा का आपके साथ मिलन हो जाता है यह क्रिया निष्काम कर्म योग कहलाती है

16.आत्मसंयम योग

धारणा ध्यान समाधि में जब संयम हो जाता है तब आत्मा का ध्यान करते हुए उसमें संयम करना आत्म संयम योग कहलाता है

17.क्रिया योग

इन छ नियमों के द्वारा प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, धारणा और समाधि। के द्वारा परमात्मा का दर्शन होना क्रिया योग कहलाता है

18.सांख्य योग

ज्ञान के माध्यम से इस प्राकृतिक माया से मुक्ति प्राप्त करना माया से मुक्त होना और इसको ज्ञान के माध्यम से जानना की माया कैसे काम करती है अपने जीवात्मा को किसी गुरु से ज्ञान लेना आत्मा क्या है सांख्य योग कहलाता है

19.श्रद्धा त्रय विभाग योग

परमात्मा में संपूर्ण विश्वास श्रद्धा प्रेम और उनको अपने जीवन का संपूर्ण समर्पण करना  श्रद्धा त्रय विभाग योग कहलाता है


योग के लाभ फायदे

योग एक अध्यात्मिक विषय है और एक वैज्ञानिक भी विषय है योग अध्यात्मिक विषय से आया हुआ है और इसका मुख्य उद्देश्य हमारी ना देखने युक्त आत्मा जीवात्मा परमात्मा की व्याख्या करता है जिसमें व्यक्ति ध्यान धारणा समाधि के द्वारा अपने शरीर के भीतर स्थित चेतन रूपी जीवात्मा को परमात्मा से संपर्क करता है इस पूरे प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति को अनेकों प्रकार के लाभ देखे जाते हैं इसके दौरान शरीर में विभिन्न लाभ प्राप्त होते हैं लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य परमात्मा प्राप्ति होता है तो इसका यही सबसे बड़ा लाभ व्यक्ति को होता है

आध्यात्मिक लाभ


जीवात्मा का आत्मा से संपर्क:  योग में सिद्धि मिलने पर जीवात्मा का परमात्मा की आत्मा से योग अपना उनसे जुड़ जाने से मोक्ष की प्राप्ति है

मोक्ष की प्राप्ति :  योग के द्वारा जब व्यक्ति परमात्मा का दर्शन कर लेता है उनसे जुड़ जाता है अर्थात है माया रुपी अज्ञान को नष्ट करके ज्ञान के प्रकाश में हो जाने से उसे तुरंत मोक्ष प्राप्ति हो पाती है

आत्मज्ञान :  जब साधक धारणा ध्यान समाधि को पार करते हुए जब अपने भीतर आत्मा का ज्ञान प्राप्त कर लेता है तब उसे आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है

परमानंद :  योग में जब वह सिद्धियां प्राप्त करने लगता है परमात्मा के साथ योग कर लेता है तब उसे परम आनंद की प्राप्ति होती है और उसे जीवन में आनंद ही आनंद आने लगता है

विचारों पर नियंत्रण:  योग में सिद्धि मिलने पर व्यक्ति अपने विचारों थॉट्स पर नियंत्रण कर पाता है वह अपने इच्छा अनुसार विचार को चलाना है वह जो चाहता है वही विचार उसके दिमाग में आते हैं उसको अपने विचारों पर नियंत्रण करने की काबिलियत उसके अंदर आ जाती है

भूत भविष्य का ज्ञान: योग में सिद्धि मिलने पर व्यक्ति को भूत भविष्य का स्वत ही ज्ञान होने लगता है वह भूत भविष्य का भविष्यवाणी करने लगता है इसका उसे यह लाभ प्राप्त होता है

शक्तियों का मिलना : साधक योग धारणा ध्यान समाधि को प्राप्त कर लेता है तब उसे अनेकों प्रकार की शक्तियां स्वत ही मिलने लगती है उसे किसी भी प्रकार की प्रयास नहीं करना पड़ता

अष्ट सिद्धि का मिलना :  धारणा ध्यान समाधि में जब वह सिद्ध कर लेता है और परमात्मा के साथ जब वह जुड़ जाता है तब उसे अष्ट सिद्धि की प्राप्ति होती है

पांच भूतों पर नियंत्रण: योग में सिद्ध होने पर व्यक्ति पांच महा भूतों पर कंट्रोल कर लेता है जिसके अनुसार वह छोटा बड़ा गायब होना अनेकों प्रकार के कार्य करने लगता है

परम शांति का मिलना : योग में सफलता मिलने पर व्यक्ति को परम शांति सुख का अनुभव प्राप्त होता है और उसका जीवन परम शांति में जीवन व्यतीत होने लगता है

शरीर पर नियंत्रण होना:  योग के प्रथम चरण में जब आसन सिद्ध होता है तब व्यक्ति को शरीर पर नियंत्रण हो जाता है जिसके अनुसार वह जिस कार्य को करता है उसमें उसे सिद्धि तुरंत मिल पाती है

मन का वश में होना:  योग के प्रथम चरण में जब आसन की क्रिया की जाती है और उसमें जब सिद्धि मिलती है तब मन व्यक्ति के वश में हो जाता है और वह जब किसी वस्तु पर धारणा ध्यान समाधि लगाता है तब उसे तुरंत उसमें सफलता मिलती है

पूरे शरीर का ज्ञान होना : योग में सिद्धि मिलने पर साधक को शरीर का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है कि शरीर कैसे काम करता है यह पूरा शरीर कैसे काम कर रहा है इसका संपूर्ण ज्ञान उसे प्राप्त हो जाता है

शरीर कैसे काम करता है इसका ज्ञान होना : योग के द्वारा शरीर कैसे काम करता है इसका व्यक्ति को ज्ञान होने से व्यक्ति अपने कर्म को सुधारता है और प्रकृति माया को नष्ट करके अपने अनुसार कर्म करने लगता है

शरीर मन बुद्धि कैसे काम करते हैं इसका ज्ञान होना: योग के द्वारा ही शरीर, मन, बुद्धि, कैसे काम करता है इसका ज्ञान प्राणी को हो जाता है जिसके द्वारा वह अपने इच्छा अनुसार शरीर मन बुद्धि को प्रयोग करना सीख लेता है

प्रकृति माया से मुक्ति का मिलना : प्राणी जब योग के माध्यम से परमात्मा से दर्शन करता है तब प्रकृति माया से मुक्त होकर सदा के लिए मोक्ष प्राप्त कर लेता है

अनेकों सिद्धियो का मिलना :  साधक जब योग के मार्ग में आगे बढ़ने लगता है तब उसे अनेकों प्रकार की सिद्धियां अपने आप ही मिलने लगते हैं

भूख प्यास पर नियंत्रण :  योग में जब आसन सिद्ध होता है तब व्यक्ति को भूख प्यास पर नियंत्रण करने की क्षमता आ जाती है वह अपने इच्छा अनुसार भूख पर नियंत्रण कर पता है

दूसरों के मन को पढ़ना :  एक योगी पुरुष किसी भी प्राणी के मन को पढ़ने की क्षमता उसके पास होती है योग में ऐसी शक्तियां है जिसके द्वारा व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के मन को पढ़ने की शक्ति उसके अंदर होती है जिसके द्वारा वह दूसरे के मन को आसानी से पढ़ लेता है और वह आपके बारे में सब कुछ जान जाता है

शरीर में ऊर्जा के स्तर में वृद्धि :  योग में जब सिद्धियां मिलने लगती है तब व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा स्तर की मात्रा अधिक तेजी से बढ़ने लगती है उसके शरीर के भीतर ऊर्जा गर्माहट महसूस होता है जिसके कारण उसे भूख प्यास नहीं लगती है और वह अधिक लंबे समय तक ध्यान करने में उसे सहायता करता है


वैज्ञानिक लाभ 


शरीर से टॉक्सिक का नष्ट होना:  योग करने से व्यक्ति के शरीर से अनेकों प्रकार के विषैला टॉक्सिक नष्ट हो जाते हैं जिससे शारीरिक स्वास्थ्य मिलता है

फेफड़े अच्छी तरह से काम करना: योग में प्राणायाम की क्रिया करने से व्यक्ति का फेफड़ा खुल जाता है जिससे उसके शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई अच्छे से होती है जिससे शरीर का विकास दर तेजी से होने लगता है

बीमारियों से मुक्ति मिलना :   योग करने से व्यक्ति बीमारियों से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है योग करने से व्यक्ति को बीमारियां कभी भी परेशान नहीं करती है बीमारियां हमेशा योगी से दूर भागती है

विकास दर का बढ़ना : योग करने से व्यक्ति के शरीर का विकास दर अधिक तेजी से बढ़ता है जिससे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और व्यक्ति की बॉडी तेजी से बनती है

शरीर का ब्लड शुद्ध होना :  प्रतिदिन योग का अभ्यास करने से व्यक्ति के शरीर में चल रहे ब्लू में सुधार शुद्ध आती है जिससे उसके शरीर से अनेकों प्रकार है हानिकारक विषैला टॉक्सिन से उसे राहत मिलती है और शरीर का विकास अच्छे से हो पाता है

शरीर में फुर्ती का आना:  प्रतिदिन योग का अभ्यास करने से शरीर में फुर्ती हल्कापन आता है जिससे चलने फिरने दौड़ने में आसानी होती है

शरीर हल्का होना: जब व्यक्ति प्राणायाम की क्रिया में सिद्ध कर लेता है तब उसका शरीर पूरी तरह हल्का हो जाता है वह खुद को वायु में उड़ाने जैसा महसूस करने लगता है

मानसिक शांति :  योग का प्रतिदिन अभ्यास करने से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है जिससे उसका पूरी तरह मन शांत स्थिर हो जाता है

एकाग्रता में वृद्धि : योग का अभ्यास करने से मन का एकाग्रता में वृद्धि होती है जिससे किसी काम में मन को लगाने पर us काम में सफलता जल्दी मिल पाती है


योग क्यो करना चाहिए

योग ही एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा प्राणी संपूर्ण ज्ञान को प्राप्त कर सकता है आत्मज्ञान की प्राप्ति परमात्मा दर्शन उनसे मिलना जुड़ना कर सकता है योग करने से कर्म बंधन से व्यक्ति मुक्त हो पता है उसे  कर्म बंधन संसार में नहीं बांधते हैं उसे परम शांति सुख की प्राप्ति होती है योग में लीन रहने से व्यक्ति आनंद में रहने लगता है जीवन को अच्छे से समझता है और समाज को आगे ले जाने में बड़ी भूमिका निभाता है 


भारत के ऋषि मुनियों ने मनुष्य के जीवन का क्या लक्ष्य है उसका जन्म क्यों हुआ है इसका उत्तर निकाल लिया है और उनके अनुसार  ब्रह्मांड का ज्ञान सबका ज्ञान योग के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है और योग से ही मनुष्य के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है इसलिए योग्य व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा करना चाहिए योग से व्यक्ति को अनेकों प्रकार के लाभ होते हैं योग करने से व्यक्ति का चित्त का एकाग्रता बढ़ता रहता है उसकी इंद्रियां उसके नियंत्रण में रहती हैं मन उसके अनुसार कार्य करता है मन व्यक्ति को बार-बार भटकाता नहीं है उसकी संपूर्ण जीवन आनंद पूर्वक होने लगता है जिसके द्वारा व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है



नादयोग क्या है अर्थ, प्रकार, उद्देस्य,रहस्य, फायदे, साधना, तरीका, संपूर्ण ज्ञान

 नाद योग अथार्थ ध्वनि के माध्यम से योग को प्राप्त करन नादयोग हठयोग प्रदीपिका में वर्णित है नाद योग एक ध्वनि पर समाधि करते हुए ब्रह्म को प्राप्त करने का तरीका है जिसके द्वारा सामान्य मनुष्य आसानी से ध्वनि पर ध्यान धारणा करते हुए मोक्ष को प्राप्त करता है नाद योग उन लोगों के लिए बनाया गया है जो कठिन योग नहीं कर सकते है नाद योग सामान्य लोगों के लिए बनाया गया है और वे लोग ध्वनि के माध्यम से सिद्धियां और ब्रह्मा की प्राप्ति करते हैं और मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं  

योग अनेक प्रकार के होते हैं लेकिन नाद योग सरल होता है नाद की साधना करना आसान होता है नाद योग में ध्वनि पर आधारित योग है इस योग में ध्वनि पर चित्त को एकाग्रचित्त करके धारणा ध्यान लगाना पड़ता है और उस ध्वनि पर ध्यान देना होता है और समाधि को प्राप्त करना होता है इसका जो मुख्य उद्देश्य परमात्मा से योग करने का ही होता है इस आर्टिकल में आप नाद योग क्या है इसका संपूर्ण ज्ञान आप प्राप्त करेंगे चलिए जानते हैं


Table OF contents 


1.नाद योग क्या है 

 1.1 नाद योग का अर्थ

2. नाद योग के प्रकार

3. नाद योग करने का उद्देश्य 

4. नाद योग का इतिहास उत्पति

5. नाद योग साधकों की अवस्थाएं 

6. नाद योग के फायदे लाभ

7. नादयोग के रहस्य

8. नाद योग करने का तरीका

9 नाद योग साधना करने का तरीका 


नाद योग क्या है 


नाद शब्द वीणा के ध्वनि से लिया गया है जिसमे मानव शरीर से भीतर शुष्म ध्वनियों पर धारणा ध्यान लगाना उस पर ध्यान केंद्रित करना उस पर चित्त को एकाग्रचित्त करने पर व्यक्ति समाधि में चला जाता है जिसमे ध्वनि से माध्यम से व्यक्ति को परमात्मा से योग हो जाता है इस पूरी प्रक्रिया को नाद योग के नाम से जाना जाता है।


नाद योग एक ध्वनि साधना है जिसमें व्यक्ति आसन में बैठकर अपने शरीर के भीतर ध्वनि पर धारण ध्यान करने का अभ्यास करता है उसमे सिद्धि मिलने पर उसे अनेक प्रकार की सिद्धियां अनेकों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं जब वह नाद योग के माध्यम से ओंकार ध्वनि को अपने शरीर के भीतर सुनने का अभ्यास करता है तब वह इस ओंकार ध्वनि पर चित्त को एकाग्रचित्त करने में सफल हो जाता है  तब उसे पर ब्रह्म की प्राप्ति होती है और वह मोक्ष को प्राप्त कर लेता है

नाद योग का अर्थ

नाद योग का अर्थ होता है : नाद अथार्थ वीणा की ध्वनि से लिया गया है शरीर के भीतर आवाज को सुनना अपने चित्त को उस ध्वनि पर एकाग्रचित्त करना उसपर ध्यान लगाना, योग - उस ओंकार ध्वनि में जब चित्त का एकाग्रचित्त हो जाने पर ध्वनि के सहायता से परमात्मा से योग हो जाना उनसे मिल जाना नाद योग कहलाता है 

नाद योग का शाब्दिक अर्थ होता है वह ध्वनि जो कण कण में इस पूरे ब्रह्मांड में उत्पन्न होती है जो सदा से गूंज रही है और गूजती रहेगी उस ध्वनि पर जब जीव अपने चित्त को एकाग्रचित्त करके धारणा ध्यान के द्वारा उस ध्वनि को सुनता है तब उसमें वह समाधि प्राप्त करता है तब वह उसे परम तत्व पुरुष को उस ध्वनि के माध्यम से जान पता है यह पूरी प्रक्रिया नाद योग के अंतर्गत आता है यही नाद योग का मुख्य उद्देश्य होता है

नाद योग का अर्थ होता है नाद+योग ध्वनि के माध्यम से परमात्मा से जुड़ना उनसे योग कर लेना नाद योग कहलाता है नाद योग में शरीर के भीतर चल रहे ध्वनियों पर ध्यान टिकाना उस पर चित्त को एकाग्रचित करना नाद योग कहलाता है 

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नाद योग के प्रकार

नाद योग को दो भागों में बांटा गया है 

1.आहद नाद : जिस ध्वनि को सुनने पर हमें दुख तकलीफ होता है जो ध्वनि बाहर से सुनाई देती है जिसके माध्यम से व्यक्ति को ध्वनि के माध्यम से पीड़ा पहुचती हैं वे ध्वनियां आहद नाद कहलाती है आहद नाद योग की आठ अवस्थाएं है


2.अनहद नाद :     वे ध्वनियां जो शरीर के भीतर से सुनाई देती हैं जिसे स्थूल कर्ण इंद्रियां नहीं सुन सकती उसे सुनने के लिए धारणा ध्यान लगाने के पश्चात सुना जाता है वे ध्वनियां अनहद नाद के नाम से जानी जाती हैं इन्हीं ध्वनियों के माध्यम से नाद योग किया जाता है अनहद नाद योग की नौ अवस्थाएं हैं 

नाद योग करने का उद्देश्य 

योग कोई भी हो प्रत्येक योग का केवल एक ही लक्ष्य होता है परमात्मा प्राप्ति उनसे जुड़ना उनसे मिलना उनसे संपर्क करना ऐसा होने पर व्यक्ति इस पूरे प्रकृति ब्रह्मांड और खुद को जान पता है कि वह क्या है और उसे संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति होती है और वह सब कुछ जान जाता है कि वह क्या है जिसके कारण वह इस संसार से मुक्त होकर परमात्मा में लीन हो जाता है और आनंदपूर्वक रहने लगता है

नाद योग एक ध्वनि पर चित्त को एकाग्रचित करने की विधि बताई गई है जिसमें शरीर के भीतर चल रही ध्वनियों पर चित्त को लगाना उसमें ध्वनियों को सुनना उसमें मन को लगाना और समाधि को प्राप्त करना ऐसा करने पर व्यक्ति को समाधि की प्राप्ति होती है और उसे परमात्मा का साक्षात्कार हो पता है नादयोग का मुख्य उद्देश्य परमात्मा प्राप्ति का ही होता है उनसे जुड़ना उनसे मिलना और आत्मज्ञान प्राप्त करना होता है जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सके।


नाद योग का इतिहास उत्पति

नाद योग का इतिहास हिंदू धर्म ग्रंथो में मिलता है जिसमें विशेषकर हठयोग प्रदीपिका में मिलता है और महर्षि गोरक्षनाथ जी ने नादा अनुसंधान के द्वारा व्यक्ति को समाधि तक पहुंचाने का एक आसान योग का मार्ग बताया है जिसमें शरीर के भीतर चल रहे शुष्म ध्वनियों को सुनते हुए उन ध्वनियों पर चित्त को एकाग्रचित्त करके धारणा ध्यान करते हुए समाधि में जाना और परमात्मा का दर्शन करना उनसे जुड़ना उनसे योग कर लेना और मोक्ष को प्राप्त कर लेना होता है 

नाद योग एक ऐसा योग मार्ग है जिसके द्वारा सामान्य पुरुष भी योग के मार्ग में समाधि कर सकता है यह योग का सबसे सरल मार्ग बताया जाता है इसके माध्यम से जो व्यक्ति कठिन योग नहीं कर सकते उन लोगों के लिए यह नाद योग की उत्पत्ति हुई है वे लोग इस नाद योग की सहायता से आसानी से समाधि लगा सकते हैं और मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं महर्षि स्वात्याराम जी ने साधकों के लिए सबसे आसान और सरल तरीका उन्होंने बताया है और उन्होंने अच्छे से इसका व्याख्या किया है की कैसे व्यक्ति नाद योग के द्वारा कैसे समाधि को प्राप्त होगा और मोक्ष को प्राप्त करेगा।

नाद योग साधकों की अवस्थाएं 

हठ योग प्रदीपिका और नादा अनुसंधान में नाद योग साधकों की चार अवस्थाएं बताई गई हैं जिसमें 

1. आरंभावस्था 
2. घटावस्था
3. परिचयावस्था
4. निष्पत्यावस्था

नाद योग के फायदे लाभ

नाद योग एक अध्यात्मिक विषय है इसमें आध्यात्मिक लाभ और वैज्ञानिक लाभ दोनों प्राप्त होते हैं जिसमें व्यक्ति को अनेकों प्रकार की शक्तियां सिद्धियां प्राप्त होती हैं और शरीर को स्वास्थ्य निरोगी जीवन प्राप्त होता है आगे आप इसके विभिन्न लाभ के बारे में जानेंगे।

आध्यात्मिक लाभ -

1. ब्रह्म से मिलना :  नाद योग का मुख्य उद्देश्य ब्रह्म प्राप्ति से ही होता है इसके कारण नाद योग में सिद्ध होने पर ब्रह्मा की प्राप्ति होती है और साधक ब्रह्म में लीन हो जाता है ।

2. सिद्धि का मिलना :   परमात्मा प्राप्ति के बाद साधक को अनेको प्रकार की सिद्धि स्वयं ही मिल जाती है सिद्धियां अनेकों प्रकार की होती हैं जैसे हवा में उड़ना शुष्म होने की शक्ति गायब होने की शक्ति जैसे अनेकों प्रकार की सिद्धि व्यक्ति को प्राप्त होती है ।

3. परम आनंद की प्राप्ति :    योग के दौरान व्यक्ति को परम आनंद की अनुभूति होती है योग अधिकतर लोग परम आनंद की प्राप्ति के लिए भी करते हैं और आनंद प्राप्त करने का योग सबसे अच्छा मार्ग माना जाता है और योग में सिद्धि मिलने पर व्यक्ति को परम आनंद की प्राप्ति होती है और वह आनंद में अपना जीवन व्यतीत करने लगता है   

4. आत्मज्ञान की प्राप्ति:   जब नाद योग में साधक समाधि को प्राप्त कर लेता है तब उसे अपने भीतर आत्मा का ज्ञान प्राप्त होता है और वह आत्मा का ज्ञान प्राप्त करके मुक्त हो जाता है    

5. शक्तियों का मिलना : जब साधक नाद योग में सफलता प्राप्त कर ले है तब उसे अनेकों प्रकार की शक्तियां मिलने लगती हैं और व्यक्ति को परमात्मा प्राप्ति में बाधा होती हैं जिसके कारण वह शक्तियों में फंस सकता है इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि वह इन शक्तियों का त्याग करते हुए परमात्मा की और बड़े और इन शक्तियों पर ध्यान ना दे ।    

6. तत्व की प्राप्ति :    नाद योग के द्वारा ही तत्व ज्ञान की प्राप्ति की जा सकती है नाद योग में सिद्धि मिलने पर व्यक्ति को तत्व का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है वह सब कुछ जान जाता है  

7.मोक्ष की प्राप्ति :  नाद योग का प्रमुख उद्देश्य होता है परमात्मा से मिलना और मोक्ष की प्राप्ति करना जब साधक नाद योग में समाधीत हो जाता है तब उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है     

8. परम शांति का मिलना :   नाद योग में जब चित्त का एकाग्रचित हो जाता है मन बुद्धि पर नियंत्रण हो जाता है तब व्यक्ति को परम शांति सुख का अनुभव होता है इस परम शांति को वह प्राप्त करता है जिसकी कल्पना करना मुश्किल है यह शांति सामान्य पुरुष को नहीं मिल पाती यह महान संत जब नाद योग में सफलता मिलती है तभी यह प्राप्त होता है

9. मन वश में होना :  नाद योग के प्रारंभ अवस्था में जब साधक को सर्वप्रथम चित्त एकाग्रचित होता है शरीर मन बुद्धि नियंत्रण में आता है तब मन वश में हो जाता है जिससे वह किसी वस्तु पर चित्त को एकाग्रचित कर पता है और ध्यान लगा पता है और समाधि को प्राप्त करता है

10. इंद्रियो पर कंट्रोल : नाद योग के प्रारंभ अवस्था में इंद्रियों पर कंट्रोल करना होता है और जब नाद योग में व्यक्ति सफल होता है तब उसे इंद्रियों पर कंट्रोल हो पता है जिससे वह भूख प्यास पर नियंत्रण कर पता है  

11. चित्त का एकाग्रचित्त :  नाद योग में सर्वप्रथम सिद्धि मिलने पर चित्त का एकाग्रचित होता है और एक वस्तु पर ध्यान लगाता है और उस ध्वनि से ध्यान नहीं भटकता और उस ध्वनि में साधक ली हो जाता है  

12. देव पुरुष की प्राप्ति: नाद योग में सिद्धि मिलने पर व्यक्ति सामान्य पुरुष से हटकर एक देव पुरुष बन जाता है वह अनेक प्रकार कि उसमें शक्तियां आ जाती हैं जिसके कारण वह सामान्य पुरुष नहीं रह जाता वह देवताओं की भाती कार्य करने लगता है

वैज्ञानिक लाभ -

1. रोगों से मुक्ति :  नाद योग जब कोई व्यक्ति करता है और उसे नाद योग में सफलता प्राप्त होती है तब उसे अनेको प्रकार की बीमारियों रोगों से मुक्ति मिलती है और उसे किसी भी प्रकार की रोग नही होते है वह रोग मुक्त हो जाता है    

2. तनाव से निजात :   नाद योग करने से व्यक्ति को तनाव से बेहद आराम मिलता है और वह तनाव को हमेशा के लिए खत्म कर देता है नाद योग करने से तनाव दूर करने में सहायता करता है 

3. मानसिक शांति :   नाद योग व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त करने में बड़ी भूमिका निभाता है जब व्यक्ति नाद योग में सफल हो पता है तब उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है
 
4. ज्ञान की प्राप्ति :   नाद योग में जब मन बुद्धि इंद्रियां सभी साधक के कंट्रोल में आ जाती हैं तब साधक किसी भी ध्वनि पर मन चित्त को एकाग्रचित कर लेता है तब उसे किसी भी वस्तु का ज्ञान कुछ ही छड़ो में प्राप्त होता है जिस वस्तु पर ध्यान लगता है उसे उस वस्तु का ज्ञान प्राप्त हो जाता है 

5. आनंद की प्राप्ति :   नाद योग करने से व्यक्ति को परम आनंद की प्राप्ति होती है जब साधक नाद योग में सिद्ध कर लेता है तब उसे आनंद की प्राप्ति होती है नाद योग के प्रथम अवस्था में व्यक्ति को आनंद की प्राप्ति होती है लेकिन जब वह समाधि चित्त हो जाता है तब उसे परम आनंद की प्राप्ति होती है

6. भूख प्यास पर नियंत्रण :  भूख प्यास पर नियंत्रण करने में नाद योग की बड़ी भूमिका निभाती है जब साधक प्रथम अवस्था में नाद योग करता है तब उसे भूख प्यास पर नियंत्रण करने की शक्ति प्राप्त होती है वह अपनी इच्छा से भूख प्यास पर नियंत्रण कर पता है

7. शरीर में ऊर्जा की वृद्धि :   नाद योग के प्रथम चरण में सिद्धि मिलने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है शरीर में गर्मी साहस की अनुभूति होने लगती है और वह खुद को ऊर्जावान महसूस करने लगता है  

नाद योग के रहस्य

नाद योग अपने आप में ही एक रहस्य है जब साधक नाद योग के प्रथम सिद्धि प्राप्त करता है तब उसे उसके शरीर में अनेकों प्रकार की जो उसके जीवन में कभी भी ध्वनियां सुनाई नहीं देती थी उसे उसके शरीर में अनेकों को प्रकार की ध्वनियां सुनाई देती हैं यह देखकर साधक भयभीत और रहस्य से भर जाता है क्योंकि व्यक्ति केवल बाहरी ध्वनियों को सुन सकता है लेकिन जब वह अपने शरीर के भीतर चल रहे ध्वनियों को सुनता है तब उसे बेहद ही आश्चर्य चकित हो जाता है वह भयभीत भी हो जाता है ऐसा वह अपने जीवन में पहली बार अनुभव करता है यह अनुभव उसको आश्चर्यचकित कर देता है

सर्वप्रथम नाद योग करने पर जब नाद योग करने में सिद्धि प्राप्त होती है तब उसे शरीर के हृदय की आवाज उसके कानों से सुनाई देती है फिर उसके भीतर चल रही नसों की ध्वनियां सुनाई देने लगती है उसके भीतर और चक्र की दुनिया ऐसे अनेकों प्रकार की आवाज़ सुनाई देने लगते हैं जिसे वह पहली बार अपने जीवन में सुनता है और वह खुद को आश्चर्य में पाता है यह नादयोग का बेहद ही रहस्यमय योग है जो योगी सर्वप्रथम योग करता है उसके लिए यह रहस्यों से भरा होता है इसके दौरान नाद योग में व्यक्ति को ध्वनियों के बारे में अनेकों प्रकार की ज्ञान प्राप्त होता है और उसे अनेकों प्रकार के शक्तियां सिद्धियां और ज्ञानप्राप्त होता है जिसे वह जानकर बेहद ही आश्चर्यचकित हो जाता है और खुद को शांत और आनंदित होता है और नाद योग करने में उसे अच्छा लगने लगता है और उस मार्ग पर आगे बढ़ने लगता है वह ध्यान में उसका मन लगने लगता है



नाद योग करने का तरीका

नाद योग में अनहद योग में आपको अपने शरीर के भीतर चल रहे नो प्रकार के ध्वनियों को सुनना होता है उसमें ध्यान लगाना होता है और समाधि को प्राप्त करना होता है आपको कैसे नाद योग करना है इसका आपको विस्तार पूर्वक बताया जाएगा जिससे आपको किसी भी प्रकार की समस्या ना आए। गोरक्षनाथ जी ने साधक को ध्यान लगाने के लिए सबसे आसान तरीका उन्होंने बताया है जिसके द्वारा कोई भी साधारण व्यक्ति आसानी से नाद योग की साधना कर सकता है

1. तरीका : मुक्तासन या सिद्धासन मैं बैठकर अपने दोनों हाथों उंगलियों से दोनों कान, आंख, नासिका, मुख, को बंद करने के पश्चात अपने शरीर के भीतर ॐ ध्वनि को सुनने का प्रयास आपको लगातार करते रहना है और चित्त को उसी में लगाते रहना है ऐसा करने पर आपको धीरे-धीरे शरीर के भीतर चल रहे अनेकों प्रकार के आवाज़ सुनाई देने लगेंगे और धीरे-धीरे आपको ओंकार ध्वनि सुनाई भी देने लगेगी । 

ओंकार ध्वनि एक ऐसी ध्वनि है जो पूरे यूनिवर्स ब्रह्मांड में गूंजती रहती है यह ध्वनि कण-कण में उत्पन्न होती रहती है इस ध्वनि को परम ब्रह्म परमात्मा की ध्वनि के नाम से भी जाना जाता है हिंदू धर्म ग्रंथ में मंत्र बोलने से पहले ॐ का उच्चारण सबसे पहले किया जाता है उसके पश्चात अन्य उच्चारण किया जाता है यह ॐ ध्वनि इस परमात्मा को सर्वप्रथम पुकारने के बाद ही अन्य नाम को बुलाया जाता है ओम ध्वनि ब्राह्मणी ध्वनि है  ॐ विष्णु देवाय नमः , ॐ नमः शिवाय, 


2. तरीका : सिद्धासन या सुख आसन में बैठकर अपनी कमर रीड की हड्डी गर्दन को सीधा रखते हुए अपने दोनों हाथों को पैरों पर जोड़कर रखें अब आपको अपने भीतर चल रहे हृदय के ध्वनि को सुनने का प्रयास करना है अपने मन ही मन हृदय की ध्वनि को आपको लगातार सुनते रहना है जब-जब आपका मन उस ध्वनि से भागेगा तब तब आपको पकड़ कर मन को उसपर पर लगाना होगा यह प्रक्रिया पूरे 3 घंटे तक लगातार चलेंगी इसके दौरान आपको अपने आंखें नहीं खोलनी है

आसन से नहीं उठना है इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि न करें ऐसा जब आप 3 घंटे तक ध्यान लगाए रखेंगे तब आपका नाद योग सिद्ध हो जाएगा तब आपको आपके भीतर चल रहे हृदय की ध्वनि साफ तेजी से सुनाई देने लगेगी उसके पश्चात जब हृदय की ध्वनि आपको बिना किसी समस्याएं के सुनाई देने लगे तो आपको और शरीर के भीतर नसो की ध्वनियों को सुनने का प्रयास करना है फिर आपको शरीर में चल रहे रक्त कणिकाओं के ध्वनियों को सुनना फिर आपके शरीर में चल रहे हैं चक्र की ध्वनियों को सुने ऐसे आपको भीतर जितना हो सके ध्वनियों को सुनने का प्रयास करना होगा और अंत में आपको ओंकार ध्वनि सुनाई देने लगेगी तब आपको उस ध्वनि में खुद को स्थिर करके रोक देना है तब आपको नाद योग में सिद्धि प्राप्त हो जाएगी.  

 

नाद योग साधना करने का तरीका 

नाद योग साधना करने का सबसे आसान तरीका बताने जा रहे हैं जिसके द्वारा आप नाद योग साधना में सिद्धि प्राप्त करके अनेकों प्रकार के शक्तियां प्राप्त कर सकते हैं और जब आप नाद योग साधना के द्वारा इसकी अंतिम अवस्था को प्राप्त करेंगे तब आपको परमात्मा का योग हो पाएगा।
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1.पहला :  नाद योग साधना करने के लिए आप अपने पूजा वाले स्थान में बैठकर या जहां पर शोरगुल ना होता हो किसी भी प्रकार की ध्वनि आपको सुनाई ना देती हो चाहे आप जंगल के गुफाओं में इसका साधना कर सकते हैं आपको ऐसे स्थान को चुनना होगा है जहां पर किसी भी प्रकार का ध्वनि ना सुनाई देती हो बिल्कुल शांत स्थान पर बैठे जहां पर अच्छी मात्रा में हवा आती हो और नाद योग की साधना सुबह 3:00 बजे से लेकर 5:00 के बीच में करें इस समय मौसम अच्छा होता है ध्यान करने के लिए यह समय सबसे पवित्र माना गया है इस समय ध्यान करने से सफलता जल्दी मिलती है अब आपको पद्म आसन या सिद्ध आसन या सुख आसन में बैठ जाना है अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें और अपने दोनों हाथों को अपने दोनों जांघों के बीच में रखें और अपनी आंखें बंद कर ले अब आपको अपने कानों से अपने भीतर चल रहे ध्वनियों को सुनना है 

आपके शरीर में सबसे पहले सुनाई देने वाली ध्वनियां हृदय की ध्वनि होती है इस ध्वनि पर आपको धारणा ध्यान लगाना होगा आपको अपने मन ही मन शरीर के भीतर ही उस ध्वनि को सुनना है सुनते समय आपका मन आपको उस ध्वनि से भटकाकर अन्य विचारों अन्य कामों पर बार-बार भटकाएगा आपको उस मन को पड़कर उस ध्वनि को लगातार सुनते रहना है यह प्रक्रिया पूरी दो से तीन घंटे तक लगातार चलेंगी इस दौरान आपको ध्यान से उठना नहीं है ना आप पैर को हिलाना है इसके दौरान आपको अनेकों प्रकार के दर्द पीड़ा को सहना भी पड़ेगा जब आप बिना किसी त्रुटि के इस पूरी प्रक्रिया को करते हैं तब 2 घंटे के भीतर आपका मन शरीर इंद्रियां कंट्रोल में हो जाती है और आपका मन उस हृदय की ध्वनि से आपको भटकाता नहीं है और वह ध्वनि आपको अच्छे से सुनाई देने लगती है और वहां से आपका ध्यान नहीं भटकता है जब ऐसी स्थिति आ जाए तब आप नाद योग सिद्ध हो चुका होंगे। 


जब हृदय की ध्वनि आपको साफ सुनाई देने लगे उसके ऊपर से ध्यान ना भटके तब आपको अब और अन्य ध्वनियों को सुनने का प्रयास करना है अब आपके शरीर में भीतर चल रहे अनेको प्रकार की ध्वनियां सुनाई देने लगेंगे आपके भीतर चल रहे ध्वनियां नसों की ध्वनियां आपके भीतर चल रही सातों चक्र की ध्वनियां जैसी अनेकों प्रकार की ध्वनियां सुनाई देंगे इन सभी ध्वनियों से आपको और गहराई में उतरना है और ओंकार ध्वनि को सुनने का प्रयास करते रहना है जब आपका ध्यान उस ओंकार ध्वनि को सुनने लगेगा तब आपको नाद योग संपूर्ण रूप से सिद्ध हो चूकेगा अब आप परमात्मा प्राप्ति के करीब आ चुके हैं अब आपको परमात्मा के दर्शन होने वाला होगा इस स्थिति में करोड़ों में कोई एक ही पहुंच पाता है इसका भी आप विशेष ध्यान दें यह जितना आसान है उतना आसान भी नहीं इसे करना थोड़ा कठिन है परंतु से किया जा सकता है। 


जब आप इस साधना अंतिम स्थिति में आ जाता है तब आपको अनेक प्रकार की सिद्धियां शक्तियां स्वयं ही मिल जाती हैं आपको अन्य किसी भी प्रकार का सिद्धि प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं पड़ती यह शक्तियां स्वम व्यक्ति के शरीर में आने लगती है और व्यक्ति देव तुल्य बन जाता है वह सामान्य पुरुष से बढ़कर एक भगवान के समान हो जाता है।



नाद योग कैसे किया जाता है ?

मुक्तासन या सिद्धासन मैं बैठकर अपने दोनों हाथों उंगलियों से दोनों कान, आंख, नासिका, मुख, को बंद करने के पश्चात अपने शरीर के भीतर ॐ ध्वनि पर मन को एकाग्रचित करें और उस ध्वनि को सुनते रहे ऐसा करने पर 2 घंटे के बाद नादयोग के सिद्ध हो जाएगा।