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दांत दर्द का मंत्र

दांत दर्द की समस्या से हैं परेशान तो आपके लिए हम लाए हैं अति प्राचीन दांत का दर्द दूर करने का मंत्र जो आपके दांत दर्द की समस्या को जड़ से खत्म कर देगा और आपको जल्दी आराम पहुचायेगा। आप इस मंत्र को नियम अनुसार करने से इसका लाभ आपको तुरंत मिलेगा और आपका कैसा भी दांत दर्द की समस्या हो उसे जड़ से खत्म कर देगा है। 


1.  दाँत दर्द का मंत्र

मंत्र...

आग बांधो, पाग बांधो। ऊपर-नीचे दाढ़ बांधो। अगिया-बेताल बांधो, सो खाल विकराल बांधो। सो लोहा-लोहार बांधों। बच्र अस होबे, बच्र फन दांत पिराय, तो महादेव पार्वती की आन।

विधि ...

थोड़े से नमक में सरसों का तेल मिलाकर उक्त मन्त्र को 11 बार पढ़े, फिर उक्त रोगी को दाँत में लगाने को दे। ऐसा 3 दिन तक करे। दाँत के दर्द से सदा के लिए छुटकारा मिल जायेगा और दांत का दर्द दूर हो जाएगा। 


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दांत दर्द से तुरंत राहत के लिए 5 प्राचीन मंत्र

2. दाँत - दर्द दूर करने का मंत्र

मंत्र... 

अग्नि बांधो, अग्नीश्वर बांधो। सौ लाल पिवाराल बांधो, सो लोहा-लोहार बांधो। वच्र के निहाय, वद्र-वन दांत विहाय, तो महादेव की आन।

विधि ...

 शाबर की विधि से मन्त्र को सिद्ध करे। बाद में 7 बार मन्त्र का जपकर दुखते हुए दाँतों को फूँके तो दन्त दर्द दूर होती है। यदि नारा उखड़ा हो तो हाथ की तर्जनी अँगुली से झाड़ना चाहिये।


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3. दांत का दर्द दूर करने का प्रभावी मंत्र

मंत्र ...

हम इक सर, तुम हो बतीस। हमरी तुम्हरी कौन-सी रीस।। हम कमाय, तुम बैठे खावो। मरती बिरीया, सड़्रहि जावो।।

विधि ...

उक्त मन्त्र को शाबर की विधि से सिद्ध करे। बाद में दाँत में दर्द होता हो तो मुँह धोने के समय सात बार मन्त्र पढ़कर कुल्ला करे। इससे दन्त-पीड़ा दर्द दूर हो जायेगी।


4. दांत दर्द झाड़ने का मंत्र। dant jhadne ka mantra


मंत्र ...

ॐ राई-राई। तू मेरी माँई।। धरती नी धूलि। मसानी छाई।। सान खवाई। सो हनुवन्त।। की ठुहाई। मारा गुरुत। जपत जलत बाई। हालि मन्त्र गुरु खवबाई।। मेरी भक्ति। गुरु की शक्ति।। फुरे मन्त्र। ईश्वरो वाचा।।


विधि ...

इस मन्त्र की साधना 21 दिन की है। श्री हनुमान जी विषयक समस्त नियमों का पालन करते हुए प्रतिदिन 1 माला का जप करने से यह मन्त्र सिद्ध होता है। फिर जब दाँत के दर्द वाला कोई व्यक्ति आये तो इस मन्त्र को जपते हुए 21 बार झाड़ा करने से शीघ्र ही दाँत दर्द से पीड़ित व्यक्ति को आराम पाता है। दांत दर्द दूर हो जाती है।


5. दांत का दर्द दूर करने का मंत्र। dant dard dur karne ka mantra

मंत्र ...

हे दंत! तुम क् यों कुलता हमें तुमें संजाइना हमरा कसर तुम हो बत्तीस हमरी-तुमरी कौन-सी रीति हम कमायं॑ तुम बैठे खाओ मृत्यु की बिटियां संग ही जाओ।

मंत्र ...

प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर नित्य-क्रिया से निवृत्त होने के पश्चात् जब मुँह धोने जाया जाता है, तब उपरोक्त मन्त्र का दाँत साफ करते वक्त 21 बार जप किया जाता है। उसके बाद जल लेकर उपरोक्त मन्त्र से ही 11 बार पढ़कर उसे अभिमन्त्रित किया जाता है और तब उस जल से कुल्ला करने के पश्चात् दाँत का दर्द समाप्त हो जाता है। हिलते हुए दाँत बैठ जाते हैं। यदि पहले दिन आराम न हो तब इस क्रिया को 11 दिन तक लगातार करते रहना चाहिए। निश्चित लाभ होगा। और दांत दर्द दूर हो जाएगा।


निस्कर्ष


दांत दर्द का यह मंत्र साबर मंत्रो से लिया गया है इन मंत्रो को किसी गुरु के द्वारा सिद्ध करने के बाद प्रयोग करने से जल्दी कार्य करते हैं क्योंकि मंत्रो का प्रयोग में करने से पहले इन्हे जागृत करना पड़ता है उसके बाद यह मंत्र अपना असर दिखाते हैं और किसी के भी दांत दर्द की समस्या को जड़ से खत्म कर देते हैं जो मंत्र सिद्ध करने वाले हैं उन मंत्रो को आप सिद्ध करके प्रयोग कर सकते हैं और जो मंत्र बिना सिद्ध किए जाप मात्र से दांत दर्द को ठीक करने का है उसे आप उसे उसी प्रकार यूज कर सकते हैं।।




घर में प्रेत बाधा के 12 लक्षण,संकेत

भूत प्रेत एक अदृश्य ना दिखाई देने वाली आत्माएं होती हैं वे किसी के भी घर में प्रवेश कर लेती हैं और इनको पहचानने के लिए कुछ संकेत लक्षण दिखाती हैं तभी इनको हम पहचान पाते हैं वरना इनको पहचानना किसी सामान्य मनुष्य की बात नहीं होती है 

इसलिए आज हम आपको घर में प्रेत बाधा के ऐसे 10 लक्षण बताने वाले हैं जिसके द्वारा आप इनको पहचान सकते हैं और इनसे खुद को बचा सकते हैं वरना यह भूत प्रेत आपके पूरे घर को बर्बाद कर देंगे,

घर में प्रेत बाधा के प्रमुख लक्षण संकेत 

 

अचानक घर में लोगों की तबीयत बिगड़ जाना, लोग बिना कारण ही बीमार होने लगे, दवा करने पर ठीक नहीं होना, एक सही होना तो दूसरा बीमार पड़ जाना, ऐसा लगातार बना रहना, यह घर में प्रेत बाधा के यह प्रमुख लक्षण होता है 


और घर में प्रेत बाधा होने पर लोगों को रात में सोते समय भूत प्रेतो के सपने दिखाई देना, रात में डर जाना, बिना कारण ही रोना जोर-जोर से, हंसना आंखें लाल कर लेना, बिना कारण ही आंखों से आंसू आना, मस्तिष्क में बिना कारण ही फालतू  विचार आना और सिर दर्द होने लगे, मन अशांत टेंशन में रहना कामकाज में मन का नहीं लगना घर के सभी लोग आपस में लड़ते झगड़ते रहना घर में बड़ी-बड़ी बीमारियां बिना कारण ही आना, ऐसे लक्षण बताते हैं कि आपके घर में प्रेत बाधा की समस्या है इसे जितना जल्दी हो इसे ठीक करा लेना चाहिए अन्यथा यह है पूरे घर को बर्बाद कर देती हैं यह था रियल जीवन में होने वाले भूत प्रेतो के प्रमुख लक्षण।


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घर में प्रेत बाधा के 12 लक्षण संकेत


ध्यान रहे घर में प्रेत बाधा होती है तब वह घर के सदस्य के लोगों पर ही अपना बुरा प्रभाव दिखाई है लोग बीमारियों में गिर जाते हैं लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ना शुरू हो जाता है भूत प्रेत का प्रकोप पूरे परिवार के लोगों पर होता है और उन्हीं के लक्षणों से इनको पहचान जा सकता है अन्य कोई तरीका नहीं है। यह पूरा खेल अदृश्य आत्मा वाला है ।


1. रात में सोते समय भूत प्रेतो भयभीत होने वाले सपने दिखाई देना, 

2. घर में भूत प्रेत होने पर जिसके ऊपर प्रेत होता है वह बिना कारण ही रोने लगे चिल्लाने लगे अपनी आंखें लाल कर ले गाली देने लगे, उसके हाथ पैर अकड़ जाएं ऐसा लक्षण दिखता है तब यह घर में बड़ी प्रेत बाधा के होने का लक्षण होता है।
 

3. अचानक बिना कारण ही अधिक गुस्सा आना आंखें लाल कर लेना, बिना वजह के ही गाली देना झगड़ा करना,

4. लोगों का दिमाग अशांत रहना दिमाग में अधिक निगेटिविटी छाई रहना किसी काम में मन का नहीं लगना चिंता डिप्रेशन लगातार बना रहना बिना कारण ही।


5. घर में प्रेत आते ही लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ जाना सर दर्द, पैर दर्द, कमर दर्द, पैर दर्द, सर में भारीपन पेट दर्द, जैसे किसी भी प्रकार के बीमारी आ जाती है दवा करने पर ठीक नहीं होती है।

6. लोग बिना कारण ही आपस में गुस्सा करने लगे बिना कारण ही एक दूसरे के ऊपर गुस्सा अधिक आना आपस में बात नहीं बनना अधिक चिंता डिप्रेशन छाए रहना।

7. घर में प्रेत बाधा होने पर बड़ी-बड़ी बीमारियां बिना कारण ही शरीर में आ जाती है और दवा करने पर ठीक नहीं होती है और बढ़ते जाता है और दवा बीमारी पर असर नहीं होना शामिल है

8. घर में प्रेत बाधा होने पर सभी सदस्यों में से कोई ना कोई एक बिना कारण ही बीमार पड़ जाता है किसी को बुखार तो किसी को पेट दर्द किसी को पैर दर्द किसी को सिर दर्द बिना कारण ही होने लगता है और दवा करने पर ठीक होना  फिर हो जाता है फिर एक ठीक होता है तो दूसरा बीमार पड़ जाता है ऐसा होने पर प्रेत बाधा ही समझना चाहिए।


9. घर में बड़ी प्रेत बाधा होने पर लोग आपस में बिना कारण ही लड़ने लगते हैं पागलों जैसी हरकतें करने लगते हैं घर से भागना बिना, कारण ही चिल्लाना बिना कारण ही जोर-जोर से हंसना फिर रोने लगना, यह सब एक प्रेत बाधा के कारण ही होता है।


10.घर में प्रेरित होने पर शरीर का अकड़ जाना हाथ पैर सुन्न हो जाना हाथ पैरों पर कंट्रोल का नहीं होना यह सब प्रेत बाधा के लक्षण है

11. अचानक पूरे शरीर में दर्द उठना सर दर्द गले में दर्द पेट दर्द कमर दर्द ऐसे सभी बीमारियां एक साथ आना एक बड़े प्रेत बाधा के लक्षण होता है


12. शरीर स्वस्थ होने पर भी अधिक घबराहट बेचैनी होना और घबराहट लगातार बने रहना और उस घबराहट में नींद नहीं आना यह एक बड़े प्रेत बाधा के लक्षण में से एक है आपको यह लक्षण दिखता है तो आपको तुरंत इसे ठीक करने के लिए प्रयास करना चाहिए।



ऊपरी बाधा के सभी लक्षणों संकेत को पहचाने बचाव करे

ऊपरी बाधा ऐसी बाधा होती है जो किसी के भी आंखों से दिखाई नहीं देती हैं यह किसी के भी घर परिवार या किसी के ऊपर हो उस व्यक्ति को बीमारियों अनेकों प्रकार की समस्याओं में डाल देती हैं जिसे हम ऊपरी बाधा, प्रेत बाधा के नाम से जानते हैं आज हम आपको यही बताएंगे की ऊपरी बाधा के कितने लक्षण होते हैं 


इनको कैसे पहचाना जाए क्योंकि भूत प्रेत किसी को दिखाई नहीं देते हैं और आपके शरीर में आ जाएंगे भी तो आप उन्हें पहचान नहीं सकते क्योंकि वह सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देते हैं इसलिए इनको पहचान के लिए संकेत लक्षणों के द्वारा ही इनका पता लगाया जाता है चलिए ऊपरी बाधा के सभी लक्षणों को जानते हैं पहचानते है।


ऊपरी बाधा के सभी लक्षण संकेत


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1. रात में सोते समय भूत प्रेत डरावने सपने दिखाई देना।

2. शरीर भारी थकान भरा लगना।

3. किसी भी कार्य में मन का नहीं लगना काम से मन भागने लगता है।

4. मस्तिष्क  पूरी तरह अशांत हो जाता है।

5. दिमाग में निगेटिव विचार अधिक मात्रा में आने लगता है।

6. एकाएक सर दर्द चक्कर घुमटे आना।

7. एका एक रोना आना, बिना कारण हंसना।

8. बिना कारण ही बातों बातों में अधिक गुस्सा करने लगना।

9. बिना कारण आंखें लाल होना आंखों से पानी निकलने लगना।

10. मन उदास रहना, चिंता डिप्रेशन में दिन-रात रहना अजीब घुटन सा लगना, यह ऊपरी बाधा के खास लक्षण होते हैं।


11. अचानक अधिक गुस्सा आने लगना और घर से भागने लगना ,


12. खुद को मारने की कोशिश करना खुद का गला दबाना दूसरों का भी गला दबाना यह भी ऊपरी बना के खास लक्षण होते हैं।

13. बिना कारण रोना आना, बिना कारण हंसना किसी को बिना कारण ही गाली देना ,बर्ताव पागलों जैसी होना यह ऊपरी बाधा के खास लक्षण होते है।


14. अचानक पागलों जैसी हरकतें करना जोर-जोर से हंसने लगना लोगों को गाली देने देना,, किसी को मारपीट देना किसी की बात को नहीं मानना पागलों जैसी हरकतें करना भी ऊपरी बाधा के खास लक्षण देखे जाते हैं।


15. शरीर में कोई बीमारी उत्पन्न हो जाना. दवा करने पर ठीक नहीं होना यह ऊपरी बाधा के प्रमुख लक्षण होते हैं।


16. सर दर्द ,पेट दर्द, पैरों में दर्द, कमर दर्द, लिवर खराब, चक्कर आना, पेट में दर्द, सीने में दर्द, शरीर में कहीं सूजन हो जाना, आंखों में जलन होना, जैसे अनेकों प्रकार के बीमारी अचानक होते हैं यह ऊपरी बाधा के कारण ही होते हैं। 


17. ऊपरी बाधा होने पर अचानक परिवार के किसी सदस्य की तबीयत बिगड़ जाती है और दावा करने पर ठीक नहीं होती है यह ऊपरी बाधा के खास लक्षण होते हैं


18. शरीर में भारीपन कमजोरी थकान चक्कर आना आंखें अंदर की ओर धस जाति है। दस्त होना ,बुखार आना जैसे तमाम तरह के बीमारी अचानक आने लगती है यह ऊपरी बाधा के प्रमुख लक्षणों में से एक है। 

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ऐसे 10 लक्षण बताते हैं कि आपके शरीर में भूत प्रेत है

घर में प्रेत बाधा के 37 लक्षण 


ऊपरी बाधा से बचाव के उपाय तरीके


ऊपरी बाधाओं को जब आप पहचान लेते हैं तब आपको ऊपरी बाधा से निजात पाने के लिए ऊपरी बाधा को दूर करने के लिए आपको अपने किसी नजदीकी ओझा तांत्रिक को अपने घर बुलाना या उनके घर जाएं और उनसे कहे की हमारे ऊपर ऊपरी बाधा की समस्या है 


इसे ठीक कर दें तो वह आपके शरीर आपके घर से ऊपरी बाधा को दूर कर देगा इसके दौरान आप से कुछ खर्च भी लगेंगे। लेकिन ध्यान रहे आप अच्छे ईमानदार तांत्रिक ओझा को ही पड़े अन्यथा वे आपकी समस्या को दूर भी नहीं करेंगे। और आपको लूट भी सकते हैं क्योंकि भूत प्रेत ऐसी समस्याएं होती हैं कि केवल तांत्रिक ओझा लोग ही ठीक कर सकते हैं अन्य कोई नहीं इसीलिए यह आपको चुना भी लगा सकते हैं इसका आप विशेष ध्यान रखें। 


अगर आप ऊपरी बाधा को खुद से दूर करने की कोशिश करते हैं तो यह आपसे होने वाला नहीं है क्योंकि ऊपरी बाधा को दूर करने के लिए आपको भी तांत्रिक ओझा बनना पड़ेगा उसका आपको ज्ञान लेना पड़ेगा तभी इसे आप दूर कर सकते हो अन्यथा नहीं।।


योग के जनक कौन है

 योग संस्कृत शब्द से आया हुआ । जो हिंदू धर्म ग्रंथो से मिलता है मनुष्य अपने जीवन को जीते हुए हिंदू धर्म ग्रंथो में बताए गए नियमों पर चलते हुवे परमात्मा की प्राप्ति करना उनसे मिलन कर लेना योग कहा जाता है ।


योग के जनक है

योग शब्द हिंदू धर्म ग्रंथो से प्राप्त होता है जिसमें योग के विषय में जानकारी शिव संहित, भगवत गीता, पुराण, विष्णु पुराण ,ब्रह्म सूत्र, जैसे आनेको ग्रंथो से योग के बारे में जानकारी मिलती है।


योग की जानकारी :   योग के विषय में जानकारी हिंदू धर्म ग्रंथो से मिलता है जिसमें योग के विभिन्न प्रकार देखने को मिलते हैं और योग शब्द हिंदू धर्म से प्राप्त होता है इसीलिए योग के विषय पूरी जानकारी वही से प्राप्त किया जा सकता है।


योग की पुस्तके :   


1. शिव संहिता, 

2. विज्ञान भैरव,

3. ब्रह्मसूत्र,

4. अष्टांग योग, 

5. योगसूत्र, 

6. भगवत गीता, 

7. पुराण, 


पुस्तको को लेखक:।   

  

1. शिव सहित :      भगवान शिव शंकर द्वारा, 

2. भगवत गीता :।  भगवान कृष्ण ,

3. अष्टांग योगा :।   महर्षि पतंजलि, 

4. ब्रह्मसूत्र :।        महर्षि वेदव्यास,

5. हठयोग:।         भगवान शिव,।  आदि किताबे है।


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योग के विषय में : 


योग हिंदू धर्म ग्रंथ से  प्राप्त होता है और योग की जानकारी  श्रीमद् भागवत गीता ,शिव संहित जैसे महान ग्रंथि से प्राप्त होता है जिससे यह तय किया जा सकता है कि भगवान श्री कृष्णा, और भगवान शिव, इनका ना जन्म होता है ना मृत्यु और योग शब्द इन्हीं के मुख से निकला हुआ है अर्थात योग के विषय में सर्वप्रथम भगवान ने ज्ञान दिया है इससे यह तय किया जा सकता है कि योग के जनक भगवान श्री कृष्णा और शंकर जी हैं और पतंजलि एक ऋषि मुनि है जबकि वे भगवान के बालक है इसलिए उनको योग का जनक नहीं माना जा सकता।।


योग के जनक :     योग के जनक भगवान शिव, भगवान कृष्ण, विष्णु जी, है आपने प्रमाण के साथ देखा, 


निष्कर्ष: 

योग के जनक उसी को माना जाएगा जिसने सर्व प्रथम योग के विषय में ज्ञान दिया है भगवान शिव एक खुद महायोगी है और भगवान शिव के बारे में किसी को नहीं पता है कि उनका जन्म कब हुआ है और उनकी मृत्यु कब होगी यह अनादि और अजन्मे माने जाते हैं तो इससे यह पता लगाया जा सकता है कि भगवान शिव ही योग के जनक हैं और योग के विषय में भगवान श्री कृष्णा भी सभी प्रकार के ज्ञान देते हैं जिसमें कर्म योग, भक्ति योग ,ज्ञान योग, जैसे अन्य को प्रकार के योग का वर्णन किया है इससे यह तय किया जा सकता है कि भगवान श्री कृष्णा भी योग के प्रवर्तक हैं ।। 

ब्रह्मचर्य क्या है अर्थ मतलब जानो

 ब्रह्मचर्य एक संस्कृत शब्द है, जो "ब्रह्म" (ईश्वर) और "चर्य" (आचरण या नियम) से मिलकर बना है। जिसे ब्रह्मचर्य कहते हैं ब्रह्मचर्य में एक नियम कर्तव्य बनाया गया है जिस पर व्यक्ति चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों को इस नियम के अनुसार चलना होता है यही ब्रह्मचर्य कहलाता है उदाहरण से समझते हैं


ब्रह्मचर्य के नियम : 


गुरु आज्ञा दें, तब उनके सामने बैठे। गुरुकी बातका श्रवण और गुरुके साथ वार्तालाप ये दोनों कार्य लेटे-लेटे न करे और भोजन करते समय भी न करे। उस समय न तो खड़ा रहे और न दूसरी ओर मुख ही फेरे। गुरुके समीप शिष्यकी शय्या और आसन सदा नीचे रहने आकर अत्रकी गर्हणा न करे। उसे देखकर हर्ष प्रकट करे। मनमें प्रसन्न हो और सब प्रकारसे उसका अभिनन्दन करे। अधिक भोजन आरोग्य, आयु और स्वर्गलोककी प्राप्तिमें हानि पहुँचानेवाला है; 


वह पुण्यका नाशक और लोक-निन्दित है। इसलिये उसका परित्याग कर देना चाहिये। पूर्वाभिमुख होकर अथवा सूर्यकी ओर मुँह करके अत्रका भोजन करना उचित है। उत्तराभिमुख होकर कदापि भोजन न करे। यह भोजनकी सनातन विधि है। भोजन करनेवाला पुरुष हाथ-पैर धो, शुद्ध स्थानमें बैठकर पहले जलसे आचमन करे, फिर भोजनके पश्चात् भी उसे दो बार आचमन करना चाहिये। भोजन करके, जल पीकर, सोकर उठनेपर और स्नान करनेपर,


गलियोंमें घूमनेपर, ओठ चाटने या स्पर्श करनेपर, वस्त्र पहननेपर, वीर्य, मूत्र और मलका त्याग करनेपर, अनुचित बात कहनेपर, थूकनेपर, अध्ययन आरम्भ करनेके समय, खाँसी तथा दम उठनेपर, चौराहे या श्मशानभूमिमें घूमकर लौटनेपर तथा दोनों संघाओंके समय श्रेष्ठ द्विज आचमन किये होनेपर भी *कर आचमन करे। चाण्डालों और म्लेच्छोंके साथ बात कर पर, स्लियों, शूद्रों तथा जूठे मुँहवाले पुरुषोंसे वार्तालाप होनेपर, जूठे मुँहवाले पुरुष अथवा जूठे भोजनको देख लेनेपर तथा आँसू या रक्त गिरनेपर भी (आचमन हाथ पैर धोना) करना चाहिये। 


अपने शरीरसे स्त्रियोंका स्पर्श हो जानेपर, अपने बालों तथा खिसककर गिरे हुए वस्त्रका स्पर्श कर लेनेपर धर्मकी दृष्टिसे आचमन करना उचित है। आचमनके लिये जल ऐसा होना चाहिये, जो गर्म न हो, जिसमें फेन न हो तथा जो खारा न हो। पवित्रताकी इच्छा रखनेवाला पुरुष सर्वदा पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख बैठकर ही आचमन करे। उस समय सिर अथवा गलेको ढके रहे तथा बाल और चोटीको खुला रखे। कहींसे आया हुआ पुरुष दोनों पैरोंको धोये बिना पवित्र नहीं होता। विद्वान् पुरुष सीढ़ीपर या जलमें खड़ा होकर अथवा पगड़ी वधि आचमन न करे। वरसती हुई धाराके जलसे अथवा खड़ा होकर या हाथसे उलीचे हुए जलके द्वारा आचमन करना उचित नहीं है।


यह नियम ब्रह्मचर्य कहलाता है यह नियम स्कंद पुराण का है आपको हम समझाने के लिए यह नियम दिखा रहे हैं अगर ब्रह्मचर्य का आपको पूरा नियम पढ़ना है तो बुक से ब्रह्मचर्य का आप नियम पढ़ सकते हैं  जो नियम आपने ऊपर पड़ा है इसी नियम के अनुसार अपना जीवन जीना ब्रह्मचर्य कहलाता है

ब्रह्मचर्य के प्रमुख लाभ जानकर तुम हैरान हो जाओगे


अर्थात शास्त्रों पुराणों में बताए गए नियमों पर चलना ब्रह्मचर्य कहलाता है 


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ध्यान देने वाली बाते: 


जो नियम शास्त्रों पुराणों में बताए गए हैं उसी नियम का पालन स्वयं भगवान राम भगवान श्री कृष्णा और समस्त देवी देवता ऋषि मुनि सभी लोग उसी नियम का पालन करते हैं इसी नियम का पालन करना ब्रह्मचर्य कहलाता है


आपने सुना होगा कि भगवान श्री कृष्णा पूरे संसार के सबसे बड़े ब्रह्मचारी कहलाते हैं जबकि वह शादी विवाह उन्होंने किया बच्चे पैदा किया तब भी उन्हें संसार का सबसे बड़ा ब्रह्मचारी कहा जाता है क्योंकि गृहस्थ में होते हुए भी ब्रह्मचर्य का पालन किया जा सकता है और भगवान श्री कृष्णा गृहस्थ में होती हुई भी इस नियम का पालन करते हैं जिसके कारण वह दुनिया के सबसे बड़े ब्रह्मचारी कहलाते हैं इसका यही कारण है जो व्यक्ति शास्त्रों के अनुसार बताए गए नियमों पर चलता है चाहे वह बैरागी हो या गृहस्थ में हो और वह उसे नियम पर चलता है तब उसे ब्रह्मचारी ही कहा जाएगा।


ब्रह्मचर्य का अर्थ 


शास्त्रों पुराणों वेदों में जो नियम कानून बताए गए हैं वे नियम कानून पर ब्रह्म परमात्मा के मुख से निकले हुए नियम कानून है और जो व्यक्ति उस नियम कानून पर चलता है तब उसे ब्रह्मचारी के नाम से जाना जाता है इसी को ब्रह्मचर्य कहते हैं

अर्थात ब्रह्मा द्वारा बताए गए नियमों पर चलना ब्रह्मचर्य कहलाता है 

ब्रह्मचर्य का मतलब : 



ब्रह्मचर्य का मतलब यह है कि व्यक्ति अपने जीवन में हिंदू धर्म ग्रंथो में बताए गए नियम कानून पर अपना जीवन  जीता है तब उसे ब्रह्मचर्य की उपाधि दी जाती है उसे ही ब्रह्मचर्य कहते हैं 


जो नियम लिखे गए हैं वह नियम पुराणों वेदों  में है जिसे पढ़कर आप अपना जीवन इस नियम के अनुसार जीते हैं तब आप एक ब्रह्मचारी कहलाते हैं इसी को ब्रह्मचर्य कहते हैं


आपको हमने एकदम सरल आसान शब्दों में ब्रह्मचर्य को समझने का प्रयास किया है अगर आपको ब्रह्मचर्य के विषय में कुछ भी समझ में ना आए तो आप हमें व्हाट्सएप नंबर पर चैट अवश्य करें।


ब्रह्मचर्य के प्रमुख लाभ जानकर तुम हैरान हो जाओगे

 ब्रह्मचर्य शब्द हिंदू धर्म से आया हुआ है जो ब्रह्मचर्य का सही ज्ञान केवल हिंदू धर्म ही दे सकता है अन्य कोई नही, और हम आपको हिंदू धर्म में बताए गए ब्रह्मचर्य का पालन करने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं आज आपको पता चलेगा कि ब्रह्मचर्य के पालन से कैसे-कैसे शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ किस स्तर पर व्यक्ति को प्राप्त होते हैं जिसे जानकर आप पूरी तरह हैरान शोक में हो जाओगे।।


Brahmachary kya hai।  ब्रह्मचर्य क्या है


ब्रह्मचर्य का अर्थ होता है ब्रह्म + चर्य अर्थात , जो ब्रह्म है जिसने पूरे ब्रह्मांड को बनाया है अर्थात ब्रह्मा + ब्रह्मा जिस नियम कानून से रहते हैं जिस आचरण से अपना जीवन जीते हैं वह आचरण जब मनुष्य अपने जीवन में उतारकर जीता है तो वह ब्रह्मचर्य कहलाता हैं 


ब्रह्मचर्य में स्वयं ईश्वर अपना जिस रूप नियम कानून से जीते हैं उसे ही ब्रह्मचर्य कहते है। और इसी नियम से पूरे संसार को जीने के लिए भगवान स्वयं सभी मनुष्यों को कहते हैं जो आचरण भगवान भी पालन करते हैं और वही आचरण आप लोगों को भी अपने जीवन में उतारने को कहते हैं वही आचरण ब्रह्मचर्य कहा जाता है अब बात आती है कि ब्रह्मचर्य करने से क्या-क्या लाभ होते हैं आईए देखते हैं। 


ब्रह्मचर्य का नियम स्त्री और पुरुष दोनों पर लागू होता है स्त्री जब ब्रह्मचर्य का पालन करती है तब उसे अलग प्रकार से लाभ होते हैं और जब पुरुष ब्रह्मचर्य का पालन करता है तब उसे अलग से लाभ प्राप्त होते हैं देखेंगे स्त्री और पुरुष दोनों को क्या-क्या लाभ प्राप्त होते हैं वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार से।


 Brahmachary ke benefits:  ब्रह्मचर्य के प्रमुख लाभ कुछ इस प्रकार है


 1. ब्रह्मचर्य से शरीर में साहस, उमंग, तेज, जोश, विशेष प्रकार की गर्मी, ताकत फुर्ती, अंदरूनी बल, शरीर में बनी रहती है


2. ब्रह्मचर्य से चेहरा खिला रहता है शरीर से विशेष प्रकार की तेज दिखाई देता है दृढ़ संकल्प किसी भी कार्य को करने का साहस तुरंत बन जाता है डर भय नहीं लगता है किसी भी कार्य को करने की अंदरूनी साहस आ जाती है।


3. ब्रह्मचर्य से इंद्रियां मन बुद्धि कंट्रोल में रहते है जिससे ब्रह्मचर्य में रहने वाला व्यक्ति किसी भी कार्य को बिना किसी समस्या के स्मार्ट तरीके से कर लेता है और उसे विशेष प्रकार की शांति सुख का अनुभव मिलता है


4. ब्रह्मचारी में अधिक मात्रा में साहस किसी भी कार्य को करने कि उसमें जिद, पागलपन साफ देखा जा सकता है और शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारियां शरीर में नहीं होती है शरीर फुर्तीला बलवान रहता है।


5. ब्रह्मचर्य से शरीर में वीर्य की मात्रा अधिक होती है जिससे उसके शरीर में अधिक मात्रा में अंदरूनी ताकत कष्ट पीड़ा को सहने की क्षमता, और बलवान, बुद्धिमान पुत्र पैदा करने की शक्ति उसके वीर्य में होती है।


6.  ब्रह्मचर्य से व्यक्ति को हर एक प्रकार से लाभ ही लाभ होते हैं चाहे अध्यात्म लाभ हो चाहे शारीरिक लाभ हो या मानसिक लाभ हो सभी प्रकार के लाभ व्यक्ति को प्राप्त होते है। और ब्रह्मचर्य के टूटने से ही सभी प्रकार के लाभ तुरंत नष्ट हो जाते हैं


ब्रह्मचर्य से किसी भी प्रकार की बीमारी व्यक्ति के शरीर में कभी भी नहीं होती है बीमारियां व्यक्ति से हमेशा दूर भागती हैं क्योंकि उसके में इतना तेज, बीमारियों से लड़ने की इम्युनिटी सिस्टम बूस्ट होती है जिससे  बीमारियां कभी भी व्यक्ति के शरीर में नहीं आती है।


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आध्यात्मिक लाभ

1. ब्रह्मचर्य का पालन करने से अनेकों प्रकार की सिद्धियां, शक्तियां अपने आप ही व्यक्ति में आ जाती है।


2. किसी को श्राप देने से वह श्राप तुरंत व्यक्ति को लगता है ब्रह्मचर्य अपने आंखों से किसी को क्रोध से भस्म करने की क्षमता व्यक्ति में आ जाती है।


3. ब्रह्मचर्य का पालन करने से ब्रह्मांड बनाने का क्षमता शक्ति व्यक्ति में आ जाता है वह ग्रह नक्षत्र अपने इच्छा से बना सकता है बिगाड़ सकता है।


4. व्यक्ति में इतनी शक्तियां सिद्धियों आ जाती है कि वह बड़े-बड़े देवी देवता स्वयं भगवान को भी श्राप देकर उनके पद से हटा सकता है उनको कष्ट पहुंचा सकता है इतनी क्षमता उसके में आ जाती है वह भगवान को ही नचा सकता है।


5. भूत भविष्य का ज्ञान व्यक्ति को हो जाता है व्यक्ति किसी के भी मन की बात को जान लेता है दूसरा व्यक्ति कैसा है उसको अपने आप ही उसका ज्ञान ब्रह्मचारी व्यक्ति को हो जाता है।


6.  ब्रह्मचारी किसी को श्राप दे दे या आशीर्वाद दे दे वह तुरंत कार्य करता है जैसे ब्रह्मचारी अगर किसी महिला को आशीर्वाद दे दे कि तुमको एक वर्ष बाद पुत्र होगा तो उसे अवश्य पुत्र होगा यह निश्चित है अगर वह किसी को एक वर्ष के भीतर करने का श्राप दे दे तो व्यक्ति 1 वर्ष बाद तुरंत मर जाएगा इतनी क्षमता ब्रह्मचारी में होती है।


7. ब्रह्मचर्य से व्यक्ति परमात्मा जितना शक्ति वाला बन जाता है क्योंकि उसमें और भगवान में कोई अंतर नहीं रह जाता क्योंकि जो आचरण भगवान का होता है वही आचरण मनुष्य करता है जिस कारण जो शक्तियां भगवान में होती है वही शक्तियां व्यक्ति के भीतर आ जाती है इसलिए व्यक्ति जो चाहता है वह कर सकता है


8. ब्रह्मचर्य का अध्यात्म में बड़ी भूमिका होती है जो ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर सकता उसे किसी भी प्रकार की शक्ति व्यक्ति को नहीं प्राप्त हो सकती है और ब्रह्मचर्य के नष्ट होने पर जितनी भी शक्तियां सिद्धियां होती हैं वह तुरंत नष्ट हो जाती हैं इस बात का ध्यान रखना चाहिए।


9. ब्रह्मचर्य ही व्यक्ति को महान देव पुरुष बनाता है जो सामान्य व्यक्ति से अलग होता है उसका आचरण ईश्वर के आचरण के जैसा होता है जिसके कारण उसके में परमात्मा अपनी शक्ति दे देते हैं जिसके कारण उसके में अनेकों प्रकार की शक्तियां आ जाती हैं लेकिन ब्रह्मचर्य को नष्ट करते ही सारी शक्तियां सिद्धियां ईश्वर नष्ट कर देते हैं इसका आप विशेष ध्यान रखें यह बातें शास्त्रों पुराणों में लिखित है यह लाभ ब्रह्मचर्य के पालन करने से होती है।


10. ब्रह्मचर्य से ही मन बुद्धि इंद्रियां सब कंट्रोल में रहती हैं व्यक्ति चाहे किसी भी कार्य को अपनी इच्छा अनुसार किसी कार्य को कर सकता है और उसमें सफलता प्राप्त कर सकता है और पूरे संसार को चलाने की क्षमता उसके में रहती है यह ब्रह्मचर्य का विशेष लाभ व्यक्ति को प्राप्त होता है।



निष्कर्ष यह निकलता है : 


मानव जीवन में ब्रह्मचर्य का विशेष योगदान होता है जो व्यक्ति ब्रह्मचर्य का जन्म से लेकर मृत्यु तक बिना किसी गलती किए ब्रह्मचर्य का पालन करता है तब व्यक्ति में आनेको प्रकार की शक्तियां सिद्धियां उसके में बनी रहती हैं और व्यक्ति में किसी भी प्रकार की रोग बीमारी नहीं रहता है और जिसका ब्रह्मचर्य नष्ट हो जाता है उसके में न शक्ति रहती है न  सिद्धियां न उसके में शारीरिक स्वास्थ्य का लाभ होता है ।


वह पूरी तरह मन शरीर, अध्यात्म दोनों प्रकार से नष्ट हो जाता है और ब्रह्मचर्य में रहने से उसे सब कुछ प्राप्त हो जाता है क्योंकि ब्रह्मचर्य का पालन बड़े-बड़े देवी देवता ईश्वर सब करते हैं क्योंकि ब्रह्मचर्य का अर्थ ही होता है कि ब्रह्म का जो आचरण है उस आचरण से जीवन जीना इसीलिए ब्रह्मचर्य को विशेष माना जाता है



अगर तुमको ब्रह्मचर्य के बारे में सब कुछ जानना है की ब्रह्मचर्य क्या है इससे  क्या लाभ होते हैं वह प्रमाण के साथ तो आप हिंदू धर्म ग्रंथ के विष्णु पुराण ,स्कंद पुराण, पद्म पुराण, जैसे महान पुस्तक को पढ़ सकते हैं और आप ब्रह्मचर्य के लाभ को जान सकते हैं या बड़े-बड़े ऋषि मुनि के एपिसोड देखे उसमें भी आपको ब्रह्मचर्य के बारे में सभी जानकारी प्राप्त हो जाएगी।


धर्म क्या है गीता के अनुसार , प्रमाण के साथ

धर्म क्या है गीता के अनुसार : गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बार-बार अपने धर्म पर निष्ठा पूर्वक चलने को कहते हैं और गीता में शुरू से लेकर अंत तक भगवान श्री कृष्णा केवल अर्जुन को धर्म के विषय में ही ज्ञान देते हैं और धर्म के अनुसार चलने को कहते हैं लेकिन वर्तमान समय में ऐसी स्थिति बन चुकी है 


कि धर्म क्या है और भगवान श्री कृष्णा कौन से धर्म की ज्ञान अर्जुन को करा रहे थे इसका किसी को ज्ञान नही है, इसलिए आज हम आपको यही जो सत्य धर्म है उसी का ज्ञान आपको हम कराने वाले हैं जिस धर्म को भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे थे उसी धर्म को हम आपको बताएंगे वह भी प्रमाण के साथ इसे जानने के बाद आपके मन में किसी भी प्रकार की दुविधा नहीं होगी और आप धर्म के विषय में सब कुछ जान सकेंगे।


what is Dharm: धर्म क्या है।


धर्म शब्द हिंदू धर्म ग्रंथ से आया हुआ है तो धर्म के विषय में केवल हिंदू धर्म ग्रंथ ही सत्य धर्म का ज्ञान प्रदान कर सकता है अन्य कोई नहीं इसलिए धर्म क्या है हिंदू धर्म ग्रंथ से देखते हैं

मनुष्य का जब जन्म होता है तब उसे इन 4 नियमों का जन्म से लेकर मृत्यु तक पालन करना होता है उसके जीवन यह उद्देश्य होता है जिसमें अर्थ, काम, धर्म, और मोक्ष,

अर्थ: अर्थ का मतलब होता है भोजन करना, अर्थात जीवन को चलाना ,जैसे एक जानवर सुबह उठने से लेकर शाम तक भोजन करता है फिर सो जाता है यही अर्थ कहलाता है व्यक्ति अपना जीवन जीने के लिए भोजन को प्राप्त करें और जीवन जीए यही अर्थ कहलाता है, जीवन जीने के लिए भोजन प्राप्त करना अर्थ कहलाता है।

काम: का अर्थ होता है कि संभोग करना, जिससे संसार आगे बड़े, और ऐसे ही संसार चलता रहे अगर संभोग न किया जाए तो संसार का विकास रुक जाएगा इसलिए काम का होना अति आवश्यक है संसार को बढ़ाने के लिए संभोग करना बच्चे पैदा करना काम कहलाता है

धर्म: का अर्थ होता है अर्थ और काम को एक नियम विधि के अनुसार कर्म करना धर्म कहलाता है

उदाहरण से :  जीवन जीने के लिए भोजन की आवश्यकता हमेशा होती है लेकिन भोजन को कैसे पाना है कैसे ग्रहण करना है एक विधि अनुसार इसे प्राप्त करना ,और काम संभोग को एक विधि अनुसार करना एक नियम से यही धर्म होता है जो व्यक्ति अर्थ और काम को धर्म विधि अनुसार नहीं करता उसे अधर्म  माना जाता है 

स्त्री समागम धर्म नियम: 

संभोग दिन में कभी नहीं करना चाहिए, संभोग हमेशा रात में करना चाहिए, किसी जल नदी में संभोग नहीं करना चाहिए, किसी मंदिर पूजा वाले स्थान पर नहीं करना चाहिए, किसी शुभ दिन ग्रहण काल में संभोग नहीं करना चाहिए, यह सब नियम धर्म कहलाता है इसी नियम धर्म को निष्ठा पूर्वक करना धर्म कहलाता है 


धर्म केवल मनुष्यों पर लागू होता है अन्य किसी पर नहीं क्योंकि मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों में सबसे अलग माना जाता है क्योंकि इसमें गलत सही का पहचान करने की उसमें विवेक होती है और अन्य प्राणियों में नहीं और इसी शरीर से मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है अन्य किसी भी शरीर से नहीं इसलिए संसार का प्रत्येक व्यक्ति धर्म का पालन करता है इसका यही कारण है

मोक्ष: का अर्थ होता है की अर्थ, काम ,और मोक्ष, तीनों को करते हुए अंत समय में इन तीनों को छोड़कर इस संसार से विरक्त होकर मोक्ष अर्थात है इस जन्म मरण के चक्र से छूटकर मोक्ष प्राप्त करना होता है जिसके बाद दोबारा इस पृथ्वी लोक में जन्म मरण की प्रक्रिया खत्म हो जाती है और मोक्ष होने के बाद इस पृथ्वी लोक पर दोबारा जन्म नहीं होता है यह मोक्ष कहलाता है मोक्ष के लिए कर्म योग ,भक्ति योग, ज्ञान योग, द्वारा प्राप्त किया जाता है यह मोक्ष कहलाता है

धर्म क्या है और आसान शब्दों में 

संसार का प्रत्येक व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक हमेशा (कर्म कार्य ) करता रहता है जैसे सोना, बैठना ,जागना सोचना घूमना ,नाचना कोई काम करना ,जैसे एक जानवर अपने दैनिक जीवन में करता हैं वैसे ही मनुष्य अपने दैनिक जीवन में करता है लेकिन मनुष्य जानवरों से अलग अपने कर्म को एक नियम विधि से करता है और यह जो नियम विधि है यही धर्म कहलाता है
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उदाहरण :

जानवर का जीवन :  सुबह उठना तुरंत भोजन करना, सोना संभोग करना ,फिर भोजन करना ,सोना यह प्रक्रिया लगातार जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है यह एक जानवर इस प्रकार कर्म करता है

मनुष्य का जीवन:   सुबह उठना है भोजन करता है घूमता है फिरता है संभोग करता है फिर सोता है फिर वही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान इंसान धर्म नियम अनुसार कैसे जागना है कैसे भोजन करना है कैसे संभोग करना है कैसे सोना है कैसे उठना है अर्थात जो कर्म व्यक्ति जानवरों के भांति करता है

इस कर्म को वह एक नियम विधि से करने लगता है जैसे सुबह उठते ही पृथ्वी माता को प्रणाम करना फिर  जाना फिर स्नान करना, ईश्वर की पूजा करना, सूर्य देव को प्रणाम करना, भोजन को देवताओं को अर्पण करना, फिर भोजन करना जिस व्यक्ति का जिस कुल में जन्म होता है उसका अलग-अलग धर्म नियम होता है और उस नियम अनुसार चलना धर्म कहलाता है


जानवर और इंसान:  एक जानवर अपने जीवन में केवल सोना भोजन करना सेक्स करना और सो जाना यही उसका पूरा जीवन इसी में व्यतीत होता है लेकिन एक इंसान भी जानवरों की भांति सोना भोजन करना ,सेक्स करना और फिर सो जाना लेकिन इसमें वह इन सभी कार्यों को एक विधि अनुसार नियम से करता है जैसे पूजा पाठ करना , शादी विवाह, झूठ नहीं बोलना ,ब्रह्मचर्य का पालन करना, सत्य बोलना लोगों की सेवा करना यह नियम धर्म कहलाता है। आप इसे और प्रमाण के साथ देखें धर्म क्या होता है तब आपको पूरा समझ में आएगा देखिए स्कंद पुराण के अनुसार धर्म नियम। 

एक स्त्री धर्म नियम स्कंद पुराण : 

पतिव्रता स्त्री पति के भोजन कर लेने पर भोजन करती है, उनके खड़े रहने पर स्वयं भी खड़ी रहती हैं, पति के सो जाने पर सोती है और पहले ही जाग उठती है। स्वामी यदि दूसरे देश में हो, तो वह अपने शरीर का श्रृंगार नहीं करती अथवा यदि किसी कार्य वश पति बाहर जाए तो वह सब प्रकार के आभूषणों। को उतार देती है। 

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पति की आयु बढ़े, इस उद्देश्य से वह कभी पति के नामका उच्चारण नहीं करती। वह दूसरे पुरुष का नाम भी कभी नहीं लेती। पति चाहे कितनी ही खरी खोटी गली बात क्यों न कह डाले, वह उसे नहीं कोसती। जब स्वामी कहते हैं कि 'यह कार्य करो' तब वह शीघ्र उत्तर देती 'जो आज्ञा नाथ! मैंने अभी इस काम को पूरा किया। आप यह सन्झ लें कि कार्य पूरा हो गया।' 

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आपने जो अभी पढ़ा एक स्त्री जब उसकी शादी विवाह हो जाती है तब वह वहां पर जाकर जो विधि बताई गई है उस विधि अनुसार अपना पूरा जीवन जीती है इसी को धर्म कहते हैं और यह नियम पुरुष और स्त्री दोनों पर लागू होते हैं लेकिन नियम अलग-अलग होते हैं आपको इन नियमों को विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण ,इन सब से धर्म का अर्थात नियम का ज्ञान लेना पड़ेगा तब जाकर आप धर्म का पालन कर सकते हैं.

इसी धर्म को श्रीमद् भागवत गीता में श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि तुम अपने छत्रीय धर्म जो शास्त्रों में वर्णित नियम धर्म को तुम निष्ठा पूर्वक पालन करो। यही धर्म पालन होता है, 

मुझे अब यकीन हो गया होगा कि आपको पूरी तरह धर्म के विषय में ज्ञान हो गया होगा कि धर्म वास्तव में क्या है और अब आगे बड़ते हैं देखते हैं कि धर्म क्या है गीता के अनुसार


धर्म क्या है गीता के अनुसार इस प्रकार है 

गीता के अनुसार धर्म इस प्रकार है कि मनुष्यों के लिए जो धर्म नियम कानून कर्तव्य शास्त्रों पुराने वेदों में बताया गया है उस विधि अनुसार अपना दैनिक जीवन में उसी नियम अनुसार कर्म अर्थात कार्य करना धर्म है यही बात भगवान श्री कृष्णा अर्जुन को समझने का प्रयास कर रहे हैं कि तुम अर्जुन अपने नियम कर्तव्य को निष्काम भाव से दृढ़ पूर्वक करो इससे तुम भागो नहीं जो तुम्हारा इस समय कर्तव्य है उस कर्तव्य को निष्ठा पूर्वक करो इस समय तुम्हारा धर्म अर्थात नियम कहता है कि तुम इन अधर्मियों को मार दो और धर्म की स्थापना करो यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को देते हैं यही धर्म है।


धर्म : धर्म यह जो शब्द है ना यह शब्द हिंदू धर्म से आया हुआ है अन्य किसी धर्म से नहीं और यह धर्म नियम कानून से बना कठिन नियम है जैसे एक आर्मी का जवान अपने शरीर को हष्ट पुष्ट करने के लिए एक्सरसाइज करता है दौड़ता है अनेकों प्रकार की व्यायाम करता है यह सारी प्रक्रिया वह एक नियम के अनुसार करता है और यही नियम उसे मजबूत सशक्त बनाता है और इसी प्रकार मनुष्य जीवन में जो धर्म है उसमें यही नियम है और यही नियम के अनुसार व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक इस नियम से चलता है जैसे।

 ब्राह्मण का धर्म जीवन:  सुबह 3:00 बजे उठना, उठते ही पृथ्वी माता ईश्वर को प्रणाम करना शौच करना, फिर व्यायाम करना स्नान करना सूर्य को नमस्कार करना जो भी मिले उसे नमस्कार प्रणाम करना फिर लोगों की सेवा करना फिर घर के इष्ट देव की पूजा करना लोगों के शादी विवाह करना यज्ञ हवन करना, और लोगों से भिक्छा लेकर अपना पूरा जीवन जीना यह एक ब्राह्मण का धर्म जीवन होता है और इसी प्रकार

छत्रिय धर्म का नियम:  एक छत्रित का धर्म जीवन कुछ इसी प्रकार होता है छत्रिय लोग अपने जीवन में बुरे लोगों को मारकर पूरे समाज की रक्षा करते  है और अपने जान की बलिदान देकर परिवार समाज की सेवा करनी होती है यही उसका कर्तव्य नियम धर्म कहलाता है भगवत गीता में श्री कृष्णा इसी को बार-बार कहते हैं कि तुम अपने धर्म को निष्ठा पूर्वक पालन करो यह सारी प्रक्रिया धर्म कहलाती है

निष्कर्ष:


यही निकलता है कि भगवत गीता में श्री कृष्णा अर्जुन को अपने छत्रिय् जो उसका धर्म नियम है कि लोगों की सेवा करना दुष्टो है का संघार करके अपने देश की रक्षा करना जैसे एक आर्मी का जवान बॉर्डर पर खड़ा होकर अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा करता है उसी प्रकार एक क्षत्रिय का धर्म होता है कि वह अपने प्राणों की बलिदान देकर अपने समाज परिवार की सेवा करें इसी को श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि तुम इस कर्तव्य से क्यों भाग रहे हो तुम इस कर्तव्य को निष्ठा पूर्वक निष्काम भाव से करो और यही जो नियम कर्तव्य है इसी को आसान भाषा में धर्म कहते हैं

अब मुझे यकीन हो गया होगा कि आप लोगों को धर्म के विषय में पूरा ज्ञान हो गया होगा कि धर्म गीता के अनुसार क्या होता है अगर तुमको धर्म का ज्ञान लेना है तो विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण ,इन धर्म ग्रंथो को पढ़कर आप धर्म के विषय में संपूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं और अपने धर्म नियम को जान सकते हैं उसमें साफ-साफ धर्म नियम बताए गए हैं और अन्य किसी भी किताबों में धर्म का ज्ञान आपको नहीं मिलेगा क्योंकि धर्म केवल हिंदू धर्म ग्रंथ में ही स्थित है 

उसी से धर्म बना है धर्म उसी को कहते हैं जिस धर्म नियम पर स्वयं भगवान ईश्वर चलते हो और आपने देखा होगा कि भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण दोनों शास्त्रों अनुसार बनाए गए धर्म नियम पर अपना पूरा जीवन जीते हैं और अपने कर्तव्य का पालन करते हैं उसी प्रकार श्री कृष्ण अर्जुन को समझते हैं कि तुम भी मेरे प्रति अपने धर्म का पालन करो भागो नहीं अपने कर्तव्य से। 

आज तुमने जाना की भागवत गीता के अनुसार धर्म क्या है और कुछ जानना है तो आप हमें कमेंट में अवश्य बता सकते हैं।।




घर की बाधा दूर करने के उपाय

घर की बाधा एक ऐसी समस्या है जिस घर में होती है वह घर कंगाल बीमारियों से भरा रहता है घर में तरह-तरह के लड़ाई झगड़ा मानसिक चिंता, डिप्रेशन, घर में एकाएक लोगों की मृत्यु होना रात में डरावने सपने आना घर के सदस्यों की तबीयत एका एक बिगड़ जाना जैसे लक्षण बताते हैं 


कि आपके घर में प्रेत बाधा है इसे दूर करने के लिए हम आपको ऐसे खास तरीके बताने जा रहे हैं जिसके द्वारा आप अपने घर से घर की बाधा को दूर कर सकेंगे या खास उपाय आपके लिए है।


घर की बाधा दूर करने के लिए यह खास उपाय अपनाएं।


किसी अच्छे तांत्रिक ओझा को अपने घर पर बुलाए।

आपके घर में प्रेत बाधा की समस्या अगर आपको महसूस हो रही है तो आप तुरंत अपने किसी नजदीक किसी अच्छे तांत्रिक ओझा या सिद्ध पुरुष को अपने घर पर बुला लाये या उनके यहां चले जाए और अपने घर की दशा को उनको बताएं कि हमारे घर में प्रेत बाधा है आप इसे ठीक करने का कष्ट करें तो वह तांत्रिक ओझा आपके घर से बाधा को दूर कर देगा इसके दौरान आपका कुछ खर्च भी लग सकते हैं इसका आप विशेष ध्यान रखें । 

अच्छे और ईमानदार तांत्रिक ओझा को ही इन सब कामों के लिए बुलाया जाता है उनके पास जाया जाता है अन्यथा गलत तांत्रिक ओझा को पकड़ने से आपके ऊपर समस्याएं भी आ सकती हैं और आपका मोटा खर्चा भी बैठा देंगे. इसीलिए सतर्क होकर यह सब काम किया जाता है।

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हमने जो आपको उपाय बताया है इसी उपाय से घर की बाधाओं को पहले और आज और आने वाले समय में इसी तरीके से घर की बाधाओं को दूर किया जाता है क्योंकि प्रेत बाधाओं को केवल तांत्रिक ओझा सिद्ध पुरुष ही दूर कर सकते हैं उनमें उनको दूर करने की क्षमता शक्तियां होती हैं और आप में ऐसी कोई शक्तियां नहीं होती है ।


भूत प्रेत बाधा ऐसी समस्याएं होती हैं जो आपके घर परिवार में होते हुए भी आप उनको ना देख सकते हैं ना महसूस कर सकते हैं कि वह आपके परिवार के ऊपर हैं क्योंकि उनका स्थूल शरीर नहीं होता है उनका सूक्ष्म ना दिखाई देने वाला शरीर होता है जिसके कारण उन्हें पहचान पाना बेहद ही कठिन हो जाता है 



इन्हें पहचानने के लिए केवल आप खास लक्षणों संकेतों से ही पहचाना जा सकता है कि आपके घर परिवार के ऊपर प्रेत बाधा है अन्यथा ऐसा कोई तरीका नहीं है जिस से आप इनको पहचान सके हां सिद्ध पुरुष इन्हें आसानी से पहचान सकते हैं लेकिन सामान्य लोग इन्हें नहीं पहचान सकते हैं।

आत्मा क्या है real life में

आत्मा क्या है:  तुम्हारा शरीर  25 तत्वों से मिलकर बना है जिसमें से पांच तत्व हटा देते हैं जिसमें आकाश ,वायु जल, अग्नि, पृथ्वी, उसके बाद 20 तत्व बचते हैं जिसमें मन, बुद्धि ,अहंकार, पुरुष तत्व परमात्मा, पंच कर्म इंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रिय पंच स्वाद इंद्रिय, है यह 20 तत्व आपकी आंखों से दिखाई नहीं देती हैं यह 20 तत्व मिलकर आत्मा का निर्माण करती है जिससे आत्मा कहते हैं

इसे हम बोल सकते हैं कि 20 तत्वों का सूक्ष्म समूह आत्मा कहलाता है अर्थात 20 तत्व से मिलकर बना सूक्ष्म शरीर आत्म होता है


मतलब : व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद व्यक्ति के शरीर का जिस पांच तत्वों से मिलकर बना होता है जिसमें आकाश वायु जल अग्नि पृथ्वी तत्व होता है और मृत्यु के समय यह पांच तत्वों से बने शरीर को अग्नि में जलाकर नष्ट कर देते हैं और जो तत्व सूक्ष्म होते हैं जिसे आप और हम नहीं देख सकते हैं उसे जलाया नही जा सकता है वह तत्व शरीर बचते हैं जिसे आत्मा कहते हैं

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यह सूक्ष्म शरीर होती है जिसे हमारी और आपकी आंखें कभी भी नहीं देख सकती हैं इन्हें केवल करने के बाद ही देखा जा सकता है या शक्तियों के द्वारा इन्हें केवल देखा जा सकता है


आत्मा का आकार:  आत्माओं का आकार एक सामान्य व्यक्ति के रूप का ही होता है उन्हें भी भूख प्यास लगती है जो स्थूल शरीर आपका होता है उसी जैसा आत्मा का शरीर होता है बस वह सूक्ष्म आंखो से दिखाई नहीं देने वाली आत्मा होती है।

ध्यान के 25 लाभ अध्यात्म - विज्ञान के अनुसार Yoglife

ध्यान के लाभ: जब कोई व्यक्ति किसी भी कार्य को करना चाहता है और कार्य को करना सुरू करता है तब सुरू में काम में दिमांग नही लगता है, जैसे पढ़ाई में मन का नहीं लगना है, कोई काम तुमको दे दिया जाए तो तुमसे वह कार्य नहीं हो पाता है


यही समस्या पूरे विश्व की केवल तुम्हारी नही , वही तुम जब किसी एक काम को बार बार करते है तब एक ऐसी स्थिति आती है जब तुम्हारा उस काम में ध्यान लग जाता है यही दिमाग की स्थिति ध्यान कहलाती है आज तुम इसी विषय पर ध्यान के लाभ जानोगे।

इसमें कोई प्रमाण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह real life में आपके साथ होता है जो बाते करेंगे तुम अपने जीवन साफ देखोगे , और मैने इसपर कई सारे eperiment  पहले ही कर लिया है उसके बाद आपको यह जानकारी दी जा रही हैं।

ध्यान के लाभ कुछ इस प्रकार होते है।


ध्यान एक स्थिति होती है जब कोई व्यक्ति किसी एक काम को करता है तब उस काम में व्यक्ति का मन नहीं लगता है दिमाग में निगेटिव विचार आने लगते हैं जिसके कारण व्यक्ति का काम बिगड़ने लगता है वही जब उस काम को व्यक्ति बार-बार करता है और ऐसा करने से व्यक्ति का मन उस काम में लग जाता है तब यह स्थिति ध्यान की होती है

 ध्यान मैं व्यक्ति का मन, बुद्धि, दिमाग, उस काम को 100% तरीके से करने लगता है जिससे वह काम जल्दी से पूरा होने लगता है और व्यक्ति का मन भटकना बंद कर देता है और मन, बुद्धि, शरीर, सब  काम में लग जाते है यह स्थिति ध्यान कहलाती है ध्यान लगने के बाद क्या-क्या लाभ तुमको होंगे आगे पढ़ें।


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1. दिमांग 100% तेजी के साथ काम करने लगता है

2. शरीर ,मन, बुद्धि ,चित्त, नियत्रण में आ जाता है।

3. किसी भी काम को 100% फास्ट तेजी के साथ तुम कर सकते है।

4. 1 years का काम 1 month में कर सकते हो।

5. मन तुम्हारा कंट्रोल में हो जाता है।

6. दिमांग बुद्धि तेजी से काम करता है। 

7. सोचने समझने की अनोखी खूबी तुम्हारे में आ जाती है

8. 500 page, 1000 page, की book को तुम मात्र घंटो दिनों में पढ़ याद कर सकते हो। 

एक बार पढ़ने के बाद भूलने की समस्या खत्म हो जाती है

9. तुम्हारे में बड़े से बड़े कार्य को जल्दी करने की खूबी  आ जाती है 

10. कम दिमांग वाला तेज दिमाग वाला हो जाता है


11. विचारों पर तुम्हारा पूरा कंटोल हो जाता है।

12. तुम्हारे  दिमाग में negetive विचार नही आते है।

13. दिमांग पूरी तरह शांत स्थिर हो जाता है।

14. किसी काम पर एकाग्रता करने की अनोखी खूबी तुम्हारे में आ जाती है 

15.  कोई कार्य हो तुम उस कार्य में एकाग्रता तुरंत बना लोगे। 

  आध्यात्मिक के अनुसार,योग में ध्यान लगने पर लाभ होंगे।


16. मन कन्ट्रोल में हो जाता है।

17. दिमांग पूरी तरह शांत स्थिर होकर काम करता है।

18. विचारों पर जो तुम्हारा कंट्रोल नही था उसपर तुम्हारा पूरी तरह कंट्रोल हो जाता है।

19. किसी काम में एकाग्रता करने विशेष प्रकार की वृद्धि तुम्हारे हो आ जाती है।

20. ध्यान लगने के बाद समाधि तुरंत प्राप्त होता है।

21. आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

22. ध्यान लगने के बाद शरीर मन बुद्धि इंद्रिय कैसे काम करती है सबका ज्ञान हो जाता है।

23. तुम शरीर के किसी भी चक्र को ध्यान से एक्टिव तुरंत  कर सकते हो।

24. ध्यान से किसी किसी भी देवी, देवता को जागृत प्रशन कर सकते हो।

25. योग में ध्यान लगने पर महा आनद की प्राप्ति हो जाती है। जिसमे तुमको सुख आनंद खुशी प्राप्त हो पाता है।

 

निष्कर्ष यह निकलता है की 


जब तुम किसी एक काम में मन बुद्धि चित्त को काम में  बार बार लगाते हो तब उस काम में दिमाग लग जाता है जिसे ध्यान कहते है। उसके बाद ध्यान लगने से काम तेजी से होता है क्योंकि काम में तुम्हारा मन साथ देने लगता है यही पूरी प्रक्रिया ध्यान कहलाती है। 

तुम जब कोई कार्य करना सुरू करते हो तब देखा होगा की तुम्हारा दिमांग उस काम में नही लगता है वही जब तुम उस कार्य को बार बार करने लगते हो तब एक ऐसी स्थिति आ जाती है जिसमे दिमाग लग जाता है यही स्थिति ध्यान होती है, ध्यान लगने के बाद काम में मन लग जाता है  , उदाहरण , school के बच्चो का पढ़ाई में मन का नही लगना, किसी काम में दिमाग का नही लगना, सामिल है। जब ध्यान लग जाता है तब बच्चा school में तेज हो जाता है।